Wednesday, July 26, 2023

be healthy flour aata with chokar

 चोकरयुक्त आटा बनाएगा ताकतवर: कैंसर, बवासीर, डायबिटीज, बीपी से बचाए, पेट के लिए संजीवनी; त्वचा भी निखारे, बालों को रेशमी बनाए 



जिस चोकर को आटे से चालकर जानवरों को खिला देते थे, आज वही चोकर ऑनलाइन 500 से 600 रुपए किलो बिक रहा है। चोकर युक्त आटे की कीमत रिफाइंड आटे से दोगुनी है। लोग नाश्ते के लिए चोकर वाली महंगी कुकीज, ब्रेड और अनाज तो खा ही रहे हैं, चोकर वाले स्क्रबर जैसे ब्यूटी प्रोडक्ट्स भी मार्केट में आ चुके हैं।


इसकी एक बड़ी वजह है चोकर के चमत्कारिक गुण। कैंसर, बवासीर, डायबिटीज और ब्लड प्रेशर तक ढेरों बीमारियों से बचाने में मददगार चोकर का रोजाना इस्तेमाल इम्यूनिटी बढ़ाता है। त्वचा को निखारता है। बालों को रेशम सा सिल्की बनाता है। लेकिन चोकर के इस्तेमाल का सही तरीका जानकर ही उसके गुणों का लाभ उठा सकते हैं।


पेट के लिए संजीवनी से कम नहीं चोकर भोपाल में महर्षि आयुर्वेद चिकित्सा संस्थान के आयुर्वेदाचार्य-डायटिशियन नेचुरोपैथ डॉ.वीके मिश्रा बताते हैं कि चोकर पेट को हेल्दी रखकर कई बीमारियों से बचाता है। यह फाइबर का अच्छा सोर्स है। पाचन तंत्र के लिए यह संजीवनी से कम नहीं। यह न सिर्फ खाने को अच्छी तरह से पचाने में मदद करता है, बल्कि कब्ज की समस्या भी दूर करता है। आंतों की सफाई में चोकर बहुत कारगर है।


यही वजह है कि चोकर वाले आटे के इस्तेमाल करने वालों को बवासीर, इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम जैसी पेट और आंतों से जुड़ी बीमारियों का खतरा कम होता है। पेट दर्द, मरोड़, गैस, एसिडिटी, खट्टी डकारें, सीने में जलन जैसी समस्याओं में भी चोकर 

फाइबर से भरपूर चोकर पाचन तंत्र को सुधारता है, पेट साफ रखता है। चोकर में मौजूद विटामिन और मिनरल्स सेहत के लिए फायदेमंद हैं। जिससे कई बीमारियां दूर रहती हैं।


दिल रहेगा जवान

कोलेस्ट्रॉल और खून में मौजूद ट्राइग्लिसराइड्स नाम के फैट से दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ता है। कई रिसर्च में यह साबित हो चुका है है कि हाई फाइबर वाला खाना दिल के लिए अच्छा है। चोकर वाला आटा खाने से शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स में कमी आती है और गुड कोलेस्ट्रॉल लेवल बढ़ता है। जिससे दिल पर मंडराता खतरा कम होता है। चोकर में मौजूद एंटीऑक्सिडेंट्स हार्ट को हेल्दी रखते हैं।


ब्रेस्ट और आंतों के कैंसर से बचाता है चोकर 'द यूरोपियन प्रॉस्पेक्टिव इन्वेस्टिगेशन इन टू कैंसर एंड न्यूट्रिशन (EPIC)' की रिसर्च बताती है कि सिर्फ फाइबर रिच फूड खाना शुरू करने से ही आंतों के कैंसर का खतरा 40 फीसदी तक कम हो जाता है। चोकर में पाए जाने वाले एंटीऑक्सिडेंट्स, फाइटिक एसिड और फाइटोकेमिकल कैंसर के ट्यूमर को बढ़ने से रोकते हैं। जिससे आंतों के कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर आदि नहीं होते।


खून बढ़ाने में मददगार डायबिटीज से भी बचाए चोकर का नियमित तौर पर इस्तेमाल टाइप-2 डायबिटीज से बचाता है। यह शरीर में खून की मात्रा बढ़ाने और एनीमिया से बचाने में मददगार है। यह ब्लड प्रेशर, खून के थक्के जमने समेत खून से जुड़ी कई समस्याओं में फायदेमंद साबित हो सकता है। मोटापे और गॉल ब्लैडर से जुड़ी बीमारियों में भी चोकर फायदा पहुंचाता है।


चोकर से पाएं निखरी - मुलायम त्वचा चोकर में मौजूद सेलेनियम, विटामिन-ई और जिंक त्वचा को निखार देते हैं। जिंक बालों के लिए भी फायदेमंद है। चोकर के स्क्रबर से डेड स्किन निकल जाती है। कील-मुहांसे दूर हो जाते हैं। त्वचा मुलायम हो जाती है। यह त्वचा पर चिपकी गंदगी साफ कर देता है। इस स्क्रबर से टैनिंग, दाग-धब्बे दूर करने में भी मदद मिलती है।


ऐसे बनाएं नेचुरल स्क्रबर

स्क्रबर बनाने के लिए 2 चम्मच गेहूं के चोकर में 2 चम्मच दही, 1 चम्मच शहद मिला लें।


तीनों को अच्छी तरह मिला लें। इससे चेहरे को स्क्रब करें। 5 मिनट बाद पानी से साफ कर लें। हफ्ते में एक बार इस स्क्रबर का इस्तेमाल करें। कोलाइटिस, अल्सर और एलर्जी में न खाएं चोकर ਪੀਰ ਦਾ ਹੀ ਮੈਂ ਬੀਰ ਅਤੇ


आयुर्वेदाचार्य डॉ. बीके मिश्रा बताते हैं कि जिन्हें कोलाइटिस है वे चोकर से बनाएं लड्डू, सब्जी और कुकीज बिना चोकर अलग किए आटा यूज करें। गेहूं के दलिया में भी चोकर रहता है। इसके अलावा आटे में अलग से चोकर डालकर भी रोटियां बना सकते हैं। चोकर से सब्जी और लड्डू बना सकते हैं ।। दही में थोड़ा सा चोकर डालकर खा सकते हैं। ब्रेड, मफिन, कुकीज और सूप में भी चोकर यूज कर सकते हैं। लेकिन, दिन में 20 से 40 ग्राम तक चोकर ही खाना चाहिए। इससे ज्यादा खाने से पेट गड़बड़ हो सकता हैं 


हफ्ते में एक बार इस स्क्रबर का इस्तेमाल करें।


कोलाइटिस, अल्सर और एलर्जी में न खाएं चोकर



Wednesday, July 12, 2023

6P THAT NEED TO DO WITH FAMILY

 करनीय कार्य परिवार के साथ

  6 प

          

           ⬇️


            1️⃣✔️

          पूजा 

  🔥🙏🏼🙏🏼🙏🏼🔥




कोई भी गीत,भजन, हनुमान चालीसा,श्री दुर्गा चालीसा आदि) कर सकते हैं। अच्छा होगा यदि बच्चों से कराएं। पूजा घर में एक दीपक अवश्य जला कर बैठें। 


         2️⃣✔️           

 📙🖍 प्रेरक प्रसङ्ग

  ✍🏼✍🏼✍🏼✍🏼✍🏼


किसी भी महापुरुष के बारे में बच्चों को बताना या उनसे कोई प्रसंग सुनना। जैसे कि वीर सावरकर, छत्रपति शिवाजी, भगवान श्री राम, भरत, कृष्ण,अर्जुन, महाराणा प्रताप आदि।



     3️⃣✔️

🔴 प्रतिभागिता🔴

अपने पूर्वजों के बारे में माता पिता हों तो उनसे अथवा खुद से बच्चों को बताना। उन्होंने कैसे संघर्ष करके हमको पाल पोस कर यहां तक पहुंचाया अथवा उनकी कोई गौरव गाथा हो तो वह भी सुनाना। और अपना वंशवृक्ष बनाना, ध्यान रहे सभी की प्रतिभागिता रहे।

 

         4️⃣☑️


        🏵 🔔

🚩4.परम्पराएँ🚩🔱🔱🔱🔅🔅

♨️♨️🔯🕉🕉      अपनी हिन्दू संस्कृति की सनातन परंपरा,संस्कार जैसे कि तुलसी का महत्व,व्रत त्योहार का महत्व,जन्म दिन कैसे मनाना, महिला सम्मान इत्यादि की जानकारी देना। अपने पूर्वजों के बारे में माता पिता हों तो उनसे अथवा खुद से बच्चों को बताना।उन्होंने कैसे संघर्ष करके हमको पाल पोस कर यहां तक पहुंचाया अथवा उन की कोई गौरव गाथा हो तो वह भी सुनाना।

                    



       

(

    

         5✔️

  🍏🍒 🏵

      प्रसाद

  🍇🍉🥛🍼☕️🍵🥘🥬🌽🥦🥥


अंत में भोजन और प्रसाद भगवान जी को भोग लगा कर वितरित करना व इसमे भी बच्चों को भोजन और प्रसाद में क्या अंतर है कि बारे में बताना।



6  प्राणायाम

🧎‍♂️स्वास्थ्य को ठीक रखने के लिए 

 ध्यान 

योगा 

स्वास क्रिया 

ताली बजाना


इस दौरान कोई भी खेल जैसे कि 100 तक  गिनती, महा पुरुषों के नाम से अंताक्षरी वगैरा कोई भी खेल खिला सकते हैं।

अंत में अगली बार कब बैठेंगे। इस बारे में तय करके ही उठना।

इस दौरान मोबाइल का प्रयोग न करें।केवल छाया चित्र या वीडियो बनाने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।


Friday, July 7, 2023

सिख धर्म में गुरु परम्परा Guru Tradition in Sikhism

सिख धर्म में गुरु परम्परा

सिख धर्म भारत का गौरव, वीर वंश का मान रहा है।

स्थापित नानक द्वारा यह देश धर्म हित कर सहा है।।

असाम्प्रदायिक प्रकृति इसकी, धर्म निरपेक्ष भाव मन में है।

दस गुरुओं की श्रेष्ठ, प्रभामय, कीर्ति पताका तर तन में है।

प्रथम गुरु गुरु नानक जी थे, अंगद, अमरनाथ में आगे

रामदास चौथे गुरु पाकर सिख धर्म के भाग्य ये जागे ।।

गुरु पद पैतृक बना तभी से अर्जुनमल पंचम में भाई। आदि ग्रंथ संकलित हुआ तब आध्यात्मिक कर की प्रभुताई ।।

खुसरो को आशीष दिए, तब जहांगीर की भृकुटि तनी थी। राजद्रोह में फांसी पाए, सिख, मुगल में खूब ठनी थी।।

अगले गुरु, श्री हरगोविंद थे, बड़े लड़ाकू, धैर्य भाव थे। शाही फौज पराजित उनसे, कीरतपुर अंतिम मुठांव थे।

गुरु हरराय, गुरु हरकिशन, पृथक राज्य के निर्माता थे। सिख धर्म की छटा निराली, सारे गुरु अद्भुत दाता ये ।।

तेग बहादुर, नवम गुरु थे, आनंदपुर में किए बसेरा पटना शहर रहे वे जाकर, गुरु गोविंद का जन्म सबेरा ।।


मिर्जा राजा जयसिंह के सुत, राजाराम सिंह के साथी ।

औरंगजेब अधिक कुपित था, दिल्ली मंगवाया बहुभांती ।। धर्म परिवर्तन, मृत्यु वरण या, गुरु को अवसर दिए गए थे।

वरण मृत्यु का किए गुरु जी धर्म हेतु निज प्राण दिए थे।।

सिर दे दिया. सार रक्षित कर गुरु ने छोड़ी अमर निशानी। फांसी पर चढ़ गये गुरु जी, यश गाथा है याद जुबानी।।

दसम् गुरु थे गोविंद सिंह जी. पूर्ण महामानव ये सच में पहुत प्रणाली कायम करके सबको रक्खे थे निज वश में।।

दीक्षित जन खालसा कहाए. सिंह उपाधि मिली उस पल में।

पंच ककार ग्रहण करना था, पीठ नहीं दर्शित रिपु दल में।।

किए संकलित ग्रंथ गुरु ने मुगलों के संग युद्ध अनेक

सवा लाख से एक तझऊं, यह भी गुरु जी की शुभ टेक।।

एक धर्मोन्मत्त अफगान ने, अंत समय नांदेड के पास पूरा मार दिया गुरुवर को, मिटी धर्म की गौरव आस।।

गौरवमय है सिख धर्म नित, गुरु जन का अतुलित बलिदान । दस गुरुओं की इसमें झांकी, इसकी महिमा दिव्य, महान ।।



Guru Tradition in Sikhism

 Sikhism is considering India's pride, heroic dynasty.

 Established by Nanak, this country has suffered for the sake of religion.

 Its non-communal nature, secular spirit is in mind.

 The best, shining, fame of the ten Gurus is in the body.

 First Guru was Guru Nanak Ji, Angad, ahead in Amarnath

 After getting Ramdas the fourth Guru, the fortune of Sikhism woke up.

 The post of Guru became hereditary since then, brother in Arjunmal Pancham. When Adi Granth was compiled, the dominance of spiritual tax.

 Blessings were given to Khusro, then Jahangir's eyebrows were raised. Got hanged for treason, Sikh, Mughal had a lot of determination.

 The next Guru was Shri Hargovind, a great fighter, with patience. The royal army was defeated by them, Kiratpur was the last stronghold.

 Guru Harrai, Guru Harkishan were the builders of a separate state. The unique aspect of Sikhism, all the gurus are wonderful benefactors.

 Teg Bahadur was the ninth Guru, settled in Anandpur and stayed in Patna city, Guru Govind was born in the morning.

 ,

 Son of Mirza Raja Jaisingh, companion of Rajaram Singh.

 Aurangzeb was more angry, he called for Delhi. Opportunities were given to the Guru for conversion, death or otherwise.

 Instead of death, Guru ji had given his life for religion.

 Gave the head Keeping the essence, the Guru left an immortal mark. Guru ji went to the gallows, the story of fame is memory.

 Govind Singh ji was the tenth Guru. A complete great man, he had kept everyone under his control by establishing a proper system.

 Where is Dixit Jan Khalsa? Got the title of Singh at that moment.

 Had to accept the punch, but did not show back in Ripu Dal.

 Guru compiled many wars with the Mughals

 I bow down to one and a quarter lakh, this is also auspicious take of Guru ji.

 A religious fanatic Afghan, killed the teacher completely near Nanded at the end, the pride of religion was destroyed.

 Glorious is the Sikh religion, the incomparable sacrifice of Guru Jan. Tableau of ten gurus in this, its glory is divine, great.

 


Saturday, June 17, 2023

bhartiya shiksha manovigyan ke aadhar



 संस्कृत साहित्य एवं भारतीय इतिहास से अनभिज्ञ लोगों का मत है कि भारत में विज्ञान था ही नहीं। विभिन्न क्षेत्रों से सम्बन्धित विज्ञान के सभी आविष्कार पाश्चात्य देशों में हुए। विश्व को विज्ञान इन्हीं देशों की देन है। यह मान्यता पूर्णतः सत्य नहीं है। यूरोपीय देश तो सत्रहवीं शताब्दी में विज्ञान से परिचित हुए। जबकि भारत में विज्ञान ईसा से हजारों वर्ष पूर्व से ही फल फूल रहा था। भारत ने सहस्रों वर्षों तक न केवल विश्व का सांस्कृतिक नेतृत्व किया अपितु उद्योग-धन्धों, कला-कौशल, ज्ञान विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी आदि क्षेत्रों में भी अग्रणी रहा। "प्राचीन भारतीयों ने गणित और विज्ञान की नींव रखी। उन्होंने काल, अवकाश दोनों को गणनाबद्ध किया और अन्तरिक्ष को भी नापा। उन्होंने जहाँ पदार्थ की रचना का विश्लेषण किया वहाँ आत्मतत्व के स्वरूप को भी समझा है। उन्होंने तर्क और व्याकरण शास्त्र की कल्पना की और उसका विकास किया, तो दूसरी ओर खगोल शास्त्र, दर्शन, तत्त्वज्ञान, औषधि विज्ञान, शरीर विज्ञान, रचना विज्ञान और गणित जैसे विविध क्षेत्रों में महती प्रगति की। अंकों, दशमलव एवं

 शून्य का आविष्कार भारत में हुआ।"" १. नानी पालखीवाला भारत की अनमोल विरासत, भारतीय विद्या भवन मुम्बई।

Role

 People ignorant of Sanskrit literature and Indian history are of the opinion that there was no science in India. All the inventions of science related to different fields happened in western countries. These countries have given science to the world. This belief is not completely true. European countries became familiar with science in the seventeenth century. While science in India was flourishing since thousands of years before Christ. India has not only led the world culturally for thousands of years, but has also been leading in the fields of industries, arts and crafts, knowledge, science and technology. "Ancient Indians laid the foundation of mathematics and science. They calculated both time and space and also measured space. Where they analyzed the composition of matter, they also understood the nature of self. They conceived logic and grammar. and developed it, on the other hand made great progress in various fields such as astronomy, philosophy, philosophy, medicine, anatomy, composition and mathematics.

 Zero was invented in India. Nani Palkhivala India's Precious Heritage, Bharatiya Vidya Bhavan Mumbai.

कपिल, कणाद, सुश्रुत, चरक, भास्कराचार्य, वराह मिहिर, नागार्जुन, भरद्वाज तथा आर्यभट्ट आदि प्राचीन भारत के वैज्ञानिकों से विश्व का प्रबुद्ध वर्ग सुपरिचित हो चुका है।

 मनोविज्ञान के विषय में भी कहा जाता है कि भारत में मनोविज्ञान था ही नहीं। जो कुछ मिलता भी है वह दर्शन के अन्तर्गत ही है। प्रथम तो भारतीय दर्शन पश्चिम के फिलॉसफी शब्द का समानार्थी नहीं है। पश्चिम में फिलॉसफी कल्पना की उड़ान मानी जाती है। जबकि भारतीय दर्शन जीवन के व्यवहार का आधार है। प्राचीन एवं महान संस्कृति के उत्तराधिकारी भारत ने जीवन की एक लम्बी यात्रा के पश्चात् जीवन के आधारभूत सत्यों का आविष्कार किया है। उन सत्यों के आधार पर भारतीय दर्शन का विकास हुआ है। भारतीय दृष्टिकोण से दर्शन और जीवन एक है। मनोविज्ञान के अध्ययन का विषय भी जीवन के सभी प्रकार के चेतन-अवचेतन व्यवहार एवं चेष्टायें हैं। यही कारण है कि भारतीय दर्शन एवं मनोविज्ञान अभिन्न विषय हैं। भारतीय मनोविज्ञान पश्चिम के समान केवल मन एवं व्यवहार के अध्ययन तक सीमित न रहकर मन से परे " आत्मतत्त्व" तक पहुँचा है। इसमें मानव जीवन सहित सभी प्राणी जगत के व्यवहार का अध्ययन एवं विकास समाहित है। पातंजल योग-सूत्र, श्रीमद्भगवद् गीता, उपनिषद् एवं आधुनिक काल में श्री अरविन्द के योग समन्वय, पुनर्जन्म एवं क्रमविकास ग्रंथ, कोलहटकर का भारतीय मानस शास्त्र एवं श्री रामकृष्ण मिशन के स्वामी निखिलानन्द द्वारा रचित "हिन्दू साइकोलॉजी" आदि सभी ग्रंथ मनोविज्ञान के प्रामाणिक ग्रंथ हैं ।

 भारतीय मनोविज्ञान के विषय में दूसरी भ्रान्ति यह है कि मनोविज्ञान एकदेशीय नहीं होता। मनोविज्ञान तो मनोविज्ञान है।

The enlightened class of the world has become familiar with the scientists of ancient India like Kapil, Kanad, Sushrut, Charak, Bhaskaracharya, Varah Mihir, Nagarjuna, Bhardwaj and Aryabhatta.

 It is also said about psychology that there was no psychology in India. Whatever is found is under philosophy only. Firstly, Indian philosophy is not synonymous with the term Philosophy of the West. Philosophy in the West is considered a flight of fancy. While Indian philosophy is the basis of the behavior of life. India, the inheritor of ancient and great culture, has invented the basic truths of life after a long journey of life. Indian philosophy has developed on the basis of those truths. From the Indian point of view philosophy and life are one. The subject of study of psychology is also all kinds of conscious-subconscious behavior and efforts in life. This is the reason why Indian philosophy and psychology are integral subjects. Unlike the West, Indian psychology has not confined itself to the study of mind and behavior and has reached beyond the mind to the "Self". It includes the study and development of the behavior of all living beings including human life. Patanjali Yoga-Sutras, Srimad Bhagavad Gita, Upanishads and Sri Aurobindo's Yoga Synergy, Reincarnation and Evolution in Modern Times, Kolhatkar's Bharatiya Manas Shastra and "Hindu Psychology" composed by Swami Nikhilananda of Sri Ramakrishna Mission, etc. are all authentic texts of psychology. .

 The second misconception about Indian psychology is that psychology is not monocentric. Psychology is psychology.


महिर,

 निकों

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 इसे भारतीय अथवा अन्य देशीय कहना उचित नहीं है। किन्तु इस प्रकार के विचार करने वाले यह भूल जाते हैं कि पश्चिम में विकसित मनोविज्ञान पूर्ण नहीं है। वहाँ पर भी मनोविज्ञान की परिभाषायें समयानुसार परिवर्तित होती रहती हैं। पश्चिमी जगत में मनोविज्ञान को पहले आत्मा (सोल) के विज्ञान के रूप में मान्यता थी। किन्तु कुछ शताब्दियों के पश्चात् आत्मा को एक दार्शनिक एवं धार्मिक प्रत्यय कहा गया और उसके स्थान पर मन (माइन्ड) को स्वीकार किया गया। परन्तु मन क्या है? उसका स्वरूप क्या है ? पश्चिम के मनोविज्ञानवेत्ता इसका निश्चित उत्तर नहीं दे सके। अतः भौतिकवादियों ने मनोविज्ञान के अध्ययन का विषय जीव का व्यवहार निश्चित किया है।

 आज भी पश्चिम के मनोवैज्ञानिकों में अनेक प्रकार के मतभेद हैं। उदाहरण के लिए व्यक्ति के विकास के सम्बन्ध में आनुवंशिकतावादी और पर्यावरणवादी अलग-अलग विचार रखते हैं। पर्यावरणवादी वाटसन आदि आनुवंशिकता को किंचित भी महत्व प्रदान नहीं करते हैं। उनका कहना है कि किसी भी वंश का बच्चा हो, उसे उपयुक्त वातावरण में रखकर उसका इच्छानुसार विकास किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में आधुनिक पाश्चात्य मनोविज्ञान पूर्णरूप से सभी को स्वीकार नहीं है। मनोविज्ञान के क्षेत्र में भारत के योगदान एवं सिद्धान्तों को स्पष्ट करने के लिए मनोविज्ञान को "भारतीय मनोविज्ञान" की संज्ञा देने की आवश्यकता हुई।

 पाश्चात्य मनोविज्ञान को तथाकथित वैज्ञानिक रूप बहुत थोड़े

 1. "First psychology lost its soul, then its mind, then it lost consciousness, it still has behaviour of a kind"-Woodworth


adept,

 Nikon

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 It is not appropriate to call it Indian or other country. But those who think like this forget that the psychology developed in the West is not complete. Even there the definitions of psychology keep on changing according to time. In the Western world, psychology was first recognized as the science of the soul. But after a few centuries, the soul was called a philosophical and religious concept and the mind was accepted in its place. But what is mind? What is its form? Western psychologists could not give a definite answer to this. Therefore, the materialists have fixed the behavior of the organism as the subject of study of psychology.

 Even today there are many differences among the psychologists of the West. For example, geneticists and environmentalists hold different views regarding the development of an individual. Environmentalist Watson etc. do not give any importance to heredity. He says that a child of any lineage can be developed as per his wish by keeping him in a suitable environment. In such a situation, modern western psychology is not completely accepted by all. In order to explain India's contribution and principles in the field of psychology, there was a need to name psychology as "Indian psychology".

 The so-called scientific form of Western psychology has very little

 1. "First psychology lost its soul, then its mind, then it lost consciousness, it still has behavior of a kind"-Woodworth

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 समय से प्राप्त हुआ है। सत्रहवीं शताब्दी तक इसका कोई विशिष्ट रूप नहीं था। १८८९ में सर्वप्रथम वुण्ट (Wundt) ने जर्मनी में लीपजिंग विश्वविद्यालय में एक मनोविज्ञान प्रयोगशाला स्थापित की और मनोविज्ञान को एक स्वतन्त्र विज्ञान के रूप में विकसित करने का श्रेय प्राप्त किया। भारतीय मनोविज्ञान का इतिहास अति प्राचीन है। श्रीमद्भगवद् गीता का काल पांच हजार वर्ष पूर्व का है। पातंजल योग सूत्र भी दो हजार वर्ष पूर्व का ही ग्रंथ है। इन दोनों ग्रंथों में मन, बुद्धि, चित्त आदि का इतना सूक्ष्म विवरण मिलता है जिससे विश्व के सभी विद्वान प्रभावित हैं। मानवीय व्यक्तित्व के विकास हेतु योग की पद्धति बताई गई है। योग आज विश्व में विज्ञान के रूप में प्रतिष्ठित हो चुका है। मुहूर्त चिन्तामणि ग्रंथ के संस्कार प्रकरण में निम्नलिखित श्लोक मिलता है जो बालक की अभिरुचि ज्ञात करने की शुद्ध मनोवैज्ञानिक विधि है- तस्मिन् काले स्थापयेत् तत्पुरस्ताद वस्त्रं शस्त्रं पुस्तकं लेखनीं च ।

 स्वर्ण रोप्यं यच्च गृहपाति बालः तैराजीवैस्तस्य वृतिः प्रविष्टा ॥ अर्थात्-बालक जब पृथ्वी पर बैठने लगे तब उसके सामने वस्त्र, शस्त्र, पुस्तक, लेखनी, स्वर्ण और चांदी रख देनी चाहिए। उनमें से बालक जो उठा ले, उसी से उसकी अभिरुचि को ज्ञात करना चाहिए।

 भारतीय मनोविज्ञान का आधार विशुद्ध आध्यात्मिक है। आत्मतत्व उसका अधिष्ठान है। आत्मतत्व को अवैज्ञानिक कहकर अमान्य नहीं किया जा सकता। आधुनिक भौतिक विज्ञान भी उसी सत्य के निकट पहुँच चुका है। अपने रे डे व्याख्यानमाला में सर जेम्स जीन्स का यह कथन बड़ा अविस्मरणीय रहेगा - " आज बड़े व्यापक तौर पर सहमति का वातावरण है। विज्ञान के अन्तर्गत भौतिकी के क्षेत्र में तो लोग इस बात पर लगभग एक मत दिखते

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 Received on time. It did not have any specific form till the seventeenth century. In 1889, Wundt first established a psychology laboratory at the University of Leipzig in Germany and received credit for developing psychology as an independent science. The history of Indian psychology is very ancient. The period of Srimad Bhagavad Gita dates back to five thousand years ago. Patanjala Yoga Sutra is also a book of two thousand years ago. In these two books, such a subtle description of mind, intellect, mind etc. is found, due to which all the scholars of the world are impressed. The method of yoga has been explained for the development of human personality. Yoga has been established as a science in the world today. The following verse is found in the Sanskar episode of Muhurta Chintamani Granth, which is a pure psychological method to find out the child's interest - Tasmin Kale Sthapayet Tatpurstad Vastram Shastram Pustakam Lekhanin Cha.

 Swarna Ropyam Yachcha Grihapati Bal: Tairajivaistasya Vriti: Entry ॥ Meaning- When the child starts sitting on the earth, then clothes, weapons, books, pen, gold and silver should be kept in front of him. Whatever the child picks up from among them, his interest should be known from that.

 The basis of Indian psychology is purely spiritual. Self is its establishment. Self-realization cannot be invalidated by calling it unscientific. Modern physics has also reached near the same truth. This statement of Sir James Jeans in his Red Day lecture will be very unforgettable - "Today there is an environment of widespread agreement. In the field of physics under science, people seem to be almost unanimous on this matter.

है कि ज्ञान का प्रवाह अभौतिक सत्य की ओर अगर है और जगत एक बड़ी मशीन-सा न दिखकर अब दिखने लगा है।

 कार्ल बी जुंग कहते हैं कि "६० वर्षों से अधिक कार्य करते उन्हें ऐसे एक भी रोगी से भेंट नहीं। जिसमें आध्यात्मिक श्रद्धा और शक्ति हो और फिर भी मनोचिकित्सक के पास आने की आवश्यकता उन्हें महसूस हुई हो। दबाव, तनाव, असन्तोष को झेलने और समाधान पाने हेतु किसी प्रकार की नींद की गोली अध्यात्म के अक्षय भण्डार से बढ़कर कारगर नहीं हो सकती।

 पाश्चात्य मनोविज्ञान संवेदना एवं चेतना को मस्तिष्क बल्कु (Cerebral Cortex) की क्रिया मानता है। यह मस्तिष्क के कार्य से भिन्न मन व आत्मा का अस्तित्व स्वीकार नहीं करता।

 यह मान्य करना होगा कि आधुनिक पाश्चात्य मनोविज्ञान ने पर्याप्त विकास किया है। जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में विशेष रूप से शिक्षा क्षेत्र में उसके योगदान को अस्वीकार नहीं किया जा सकता। किन्तु फिर भी हमें इस तथ्य को भी मान्य करना होगा कि पाश्चात्य मनोविज्ञान से कहीं अधिक विस्तृत क्षेत्र भारतीय मनोविज्ञान तथा योग मनोविज्ञान का है। भारतीय मनोविज्ञान के अध्ययन से पाश्चात्य मनोविज्ञान की अपूर्णता की पूर्ति भी होगी और हम विश्व को एक सर्वांगपूर्ण मनोविज्ञान उपलब्ध करा सकेंगे।


It is believed that the flow of knowledge is towards the non-material truth and the world has started appearing instead of looking like a big machine.

 Carl B. Jung states that "In over 60 years of work, he has not come across a single patient who had spiritual faith and strength and yet felt the need to see a psychiatrist. No sleeping pill can be more effective than the inexhaustible storehouse of spirituality to get the solution.

 Western psychology considers sensation and consciousness to be the function of the cerebral cortex. It does not accept the existence of mind and soul apart from the functions of the brain.

 It has to be acknowledged that modern western psychology has made substantial progress. His contribution in various walks of life especially in the field of education cannot be denied. But still we have to accept the fact that Indian psychology and yoga psychology have a much wider area than western psychology. The study of Indian psychology will also fulfill the incompleteness of western psychology and we will be able to provide a holistic psychology to the world.

Wednesday, June 7, 2023

राष्ट्रीय चारित्र्य और व्यक्तिगत चारित्र्य

 युगाब्द ५१२५ ॐ वि. संवत्२०८०

 2023 विषय:- राष्ट्रीय चारित्र्य और व्यक्तिगत चारित्र्य

 (२७/०५/२०२३) 


• व्यक्तिगत चरित्र एवं राष्ट्रीय चरित्र एक सिक्के के दो पहलूहै, समाज जीवन को आगेबढ़ानेके लिए दोनों ही अति आवश्यक है। • जो व्यक्ति समाज मेंदिखाई देतेहैकई बार प्रश्न खड़ा होता है? गौशाला या मंदिर मेंदान देतेहैतो धन कहाँसेआया ? कालाबाजारी, भ्रष्टाचार से आया, बाहर सेदेखेतो अच्छा है, पर व्यक्तिगत देखा जाए तो व्यभिचार, मिलावट खोरी, कर चोरी, लम्पट इत्यादि है। • उदाहरण- असम सीमा सेअवैध घुसपैठ हो रही है, जाँच अधिकारी ने रिश्वत लेकर रिपोर्टको सही ठहराया, यह देश के साथ घातक है, दूसरा उदाहरण- कं धार मेंवायुयान अपहरण का। • पश्चिम की अवधारणा- साध्य हैवही साधन तय करेगा- मैकियावली। व्यक्ति के दुर्गुण को नहीं देखतेहै, परंतुराष्ट्रीय चरित्र अच्छा है। • हमारेयहाँमर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम एवंछत्रपति शिवाजी महाराज का चरित्र हमारेसामनेहै। कल्याण के सूबेदार की पुत्रवधुका शिवाजी के सैनिकों द्वारा अपहरण और उनको शिवाजी महाराज के सामनेप्रस्तुत किया गया। शिवाजी नेकहा- मेरी माँसाहिबा इतनी सुंदर होती तो मैंभी सुंदर होता, उस महिला को सम्मानपूर्वक कल्याण भेजा, यह था व्यक्तिगत चारित्र्य। • श्री गुरुजी नेकहा- जब राष्ट्र पर संकट आता हैतो समाज को कितना सजग रहना पड़ता है, (माता हारी महिला का उदाहरण- प्रथम विश्व युद्ध के दौरान, मित्र देशों की खुफिया जानकारी जर्मनी को पता चल जाती था।) • हनुमान जी द्वारा लंका जलाकर वापस गए, श्रीराम की सेना समुद्र के उस पार आ गई, मंदोदरी रावण को समझाती है, रावण के मंत्री कहतेहैवानरों को हम ऐसेही कच्चा चबा जाएँ गे। राजा को सही सलाह देना मंत्री का कार्यहै। • चाटुकारिता सेदूर- स्वयंसेवकों नेराज गोपालाचारी जी को बताया की एक समिति बनाई है, इस समिति मेंश्रीगुरुजी भी हैतो उन्होंनेउस पर हस्ताक्षर कर दिए, श्री गुरुजी पर इतना विश्वास था । • अतिसज्जनता:- उदाहरण- सोमनाथ के मंदिर का रास्ता गजनी को एक पुजारी नेबताया, हमारे विदेशी मंत्री वहाँगए तो वहाँउसको कोई नहीं जानता। • मिर्जाराजा जयसिंह भगवान श्री राम का वंशज मानता था, घंटों पूजा पाठ भी करता था, परंतुवह औरंगजेब के साथ मिलकर शिवाजी महाराज सेयुद्ध करनेगया, शिवाजी महाराज उसको पत्र लिखतेहैयदि तूस्वयंआता तो तेरेघोड़ेकी रकाब पकड़कर सारा दक्षिण विजय करके देता। • १९४७ भारत का बँटवारा, बीकानेर एवं दो अन्य रजवाड़ा जिन्ना सेमिलकर पाकिस्तान मेंमिलने की योजना एवंसरदार पटेल सेमिलनेका उदाहरण। • गुजरात के राजा करण सिंह का उदाहरण। • सचिव बैद गुरु तीनि जौं प्रिय बोलहिं भय आस । राज धर्मतन तीनि कर होइ बेगिहीं नास ।। गोस्वामीजी कहतेहैंकि यदि मंत्री, वैद्य और गुरु भय या लाभ वश प्रिय बोलतेहैंतो इनमेंसेमंत्री का राज्य, वैद्य का शरीर एवं गुरु का धर्मशीघ्र ही नाश हो जाता है। • राष्ट्रीय चारित्र्य का अद्वितीय उदाहरण- १६८० मेंशिवाजी महाराज के बाद सँभाजी छत्रपति बने, अष्टप्रधान मेंआपस मेंएक राय नहीं बनी, सँभाजी नेखंडोंबहल्लाल के पिताजी की हत्या कर दी, बहन के साथ दुराचार किया, तो भी खंडों जी का कहना की स्वराज ईश्वरीय योजना सेहै, स्वराज का साथ दिया, राजाराम जी को जेल सेछुड़ाकर भी लाए। • स्वामी विवेकानंद कहतेहैकि तीन करोड़ जनसंख्या के देश नेतीस करोड़ वालेदेश पर राज्य किया, क्योंकि वेसंगठित थे। उनमेंदेशभक्ति का भाव था। • नेपोलियन को वाटरलूके युद्ध मेंहरानेवाला - डयूक ऑफ वेलिगटन। • संघ मेंसूचना के बाद सोचना नहीं, यह अनुशासन के लिए आवश्यक है, समय का पालन। यह सब कै सेहोगा- १. व्यक्ति निर्माण, २. परिवार मेंसंस्कार । • हमारा जीवन कै सा है, नागरिक कर्तव्य का पालन करतेहैक्या? पड़ोसी के साथ व्यवहार कै सा है। • उदाहरण- दादा धर्माधिकारी जी बुराई सेदूर रखना। • ध्येय प्रति समर्पित- द्रौपदी और धर्मराज युधिष्ठिर का संवाद। • शिक्षा- देश हमेदेता हैसब कु छ, हम भी तो कु छ देना सीखें। • इस विषय का अध्ययन करतेरहिये।

sangh geet

: मिलता है सच्चा सुख केवल,

हमको तो संघ की शाखा में। 

'हमको तो संघ की शाखा में..' 2

मिलता है .....

      यहाँ भगवा ध्वज लहराता है, 

      हमें त्याग का पाठ पढ़ाता है। 

      आनन्द बहुत ही आता है, हम को तो संघ की शाखा में 

      मिलता है ....

हमें हिन्दू-संगठन करना है, 

निज ध्येय-मार्ग बढ़ना है। 

मिलकर सब ही से चलना है, हमको तो संघ की शाखा में 

मिलता है ....

      सब देश-भक्त बन जाएंगे, 

      भारत को सुखी बनाएंगे। 

      हिन्दू को वीर बनाना है, हम को तो संघ की शाखा में 

      मिलता है ....

यह भारत देश हमारा है,

हमें प्राणों से भी प्यारा है। 

यह जीवन सफल बनाना ,है हमको तो संघ की शाखा में 

मिलता है ....

      केशव जी का सन्देश यही, 

      माधव जी का उपदेश यही।

      बस देश-भक्ति सिखलानी है, हम को संघ की शाखा में 

      मिलता है ....




 धरती की शान, तू है मनु की सन्तान 

तेरी मुट्ठियों में बन्द तूफान है रे, 

मनुष्य तू बड़ा महान् है, भूल मत।।धृ।।

         तू जो चाहे पर्वत, पहाड़ों को फोड़ दे, 

         तू जो चाहे नदियों के मुख को भी मोड़ दे, 

         तू जो चाहे माटी से, अमृत निचोड़ दे, 

         तू जो चाहे धरती को अम्बर से जोड़ दे,

         अमर तेरे प्राण,

         अमर तेरे प्राण, मिला तुझको वरदान, 

        तेरी आत्मा में स्वयं भगवान है, रे।।1।। मनुष्य तू......

नयनों में ज्वाल तेरी गति में भूचाल, 

तेरी छाती में छिपा महाकाल है, 

पृथ्वी के लाल, तेरा हिमगिरि सा भाल, 

तेरी भृकुटि में ताण्डव का ताल है, 

निज को तू जान,

निज को तू जान, जरा शक्ति पहचान, 

तेरी वाणी में युग का आह्वान है रे।।2।। ।। मनुष्य तू....





: जलते जीवन के प्रकाश में, अपना जीवन तिमिर हटाएँ।

उस दधीचि की तप: ज्योति से, एक एककर दीप जलाएँ॥

        जल-जल दीप प्रखर तेजस्वी, अरुणाञ्चल माता का कर दें

        अमृतमय शोभामय मधुमय, भारत भू वैभव से भर दें

        निजादर्श रख निज जीवन को, हँसते-हँसते भेंट चढ़ाएँ॥1॥ जलते जीवन....

जगें जगाएँ मातृभूमि को, पुण्य भूमि को जन्मभूमि को 

अर्पित कर दें जीवन की, तरुणाई पावन देव-भूमि को 

तन में शक्ति हृदय में बल हो, प्रभु वह ज्योति पुनः प्रकटाएँ॥2॥ जलते जीवन....

         नहीं चाहिए पद-यश गरिमा, सभी चढ़ें माँ के चरणों में

         भारतमाता की जय केवल,  शब्द पड़ें जग के कर्णों में 

         आशा रख विश्वास बढ़ाकर, श्रद्धामय जीवन अपनाएं॥3॥ जलते जीवन....

Friday, March 31, 2023

मोहन भागवत जी संबोधन 1/4/2023

*समापन सत्र-परम पूजनीय सरसंघचालक जी*
१.डॉ हेडगेवार जी ने प्रारंभ में ही पूर्ण स्वतंत्रता का लक्ष्य रखा था संपूर्ण स्वतंत्रता की यात्रा पूर्ण स्वतंत्रता प्राप्त करना है,इसको प्राप्त करने के लिए भारत को खड़ा करना है
२.हम अब हम इतने बड़े हो गए हैं कि संपूर्ण स्वतंत्रता और विश्व पर हमारा प्रभाव दिखने लगा है 
३.उपनिषद की कथा- एक वृक्ष पर एक जीव फल खा रहा है दूसरा मित्र देख रहा है, यह धारा चलती रहेगी,केवल आत्मा परमात्मा से सृष्टि नहीं चलती सारी प्रकृति को संभालना है तो हमने जो किया है उसे और शक्ति चाहिए 
४.बाहर की चीजों को संभालने के लिए समाज में स्थिति एवं रचना उत्पन्न करना बदनाम करने की प्रवृत्ति से निपटने के लिए समाज को भी तैयार करना 
सारे समाज को आत्मीयता चाहिए सेवा आदि के माध्यम से समाज का प्रबोधन करना
५.हम क्या है क्या होना चाहिए  चुनौतियां क्या क्या है समाधान में हमारे क्या भूमिका हो इस काम की एक प्रकृति है, दूसरा काम उसका प्रकार ओर पद्धति भी अलग है, यह दोनों जुड़े हैं 
६.जीव है इसलिए आत्मा है ये चाहकर भी अलग नहीं हो सकते पूर्ण भिन्न फिर भी दोनों की धाराओं को संभाल कर चलना
७.जिला स्तर तक के कार्यकर्ता के मन में अंतर स्पष्ट होना चाहिए अभी नहीं है 
८.हमारी सामूहिक पद्धति है पहले हम सब समझने वाली बातों को ठीक ढंग से सुने समझें,छोटी-  छोटी बातें रास्ते से हटा देती है 
९.पुरानी एवं शाश्वत बातें स्थाई है कुछ को हटाना पड़ता है कुछ को जोड़ना पड़ता है,नित्यानित्य विवेक हमको समझना पड़ेगा तब समझकर नीचे उतरेगा 
१०.अब हम छुप नहीं सकते दुनिया हमको दिखाएगी ,अब समुत्कर्ष महाविद्यालय शिविर नाम देना पड़ता है क्यों ? नए-नए विचित्र नाम क्यों देना, दिखने के लिए होंगे तो दिखे जाएंगे,दिखने से परे जाकर संगठन श्रेणी के काम करने की आवश्यकता
११.समाज के जितने प्रकार हैं उनमें हमको काम खड़ा करना पड़ेगा प्रांत भाषा क्षेत्र सब स्तर पर,सर्वस्पर्शी काम हो 
१२.मनुष्य निर्माण- शाखा में १३ सूर्य नमस्कार, वही नहीं रुकना रुक जाएगा तो अच्छा कार्यकर्ता नहीं बन सकता, उंगली से चांद दिखाना उंगली ही नहीं देखते रहना, इन सब में से कार्यकर्ता कैसा बन रहा है,मित्र बनाने की कला होना चाहिए
१३.सब लोगों को साथ जोड़ने की कला अपनी दृष्टि ऐसी बनानी पड़ेगी लेकिन उसकी दृष्टि सब को अपना बनाने की नहीं बन रही है मन की आत्मीयता होते हुए प्रगति को संभालना,मित्र बनाने वाले स्वयंसेवक खड़ा करेंगे करना उसको जानकारी,विवेक होना चाहिए 
१४.राम कृष्ण परशुराम बुद्ध देश काल परिस्थिति के अनुसार आचरण,सामने वाला कैसा है उसके आधार पर आचरण इसका विवेक इसलिए स्पीड लिटरेस दोनों का संतुलन,जो दुनिया में से रास्ता निकाल सके ऐसी बातों को समझने और समझकर चलेंगे तो सब ठीक होगा 
१५.इसलिए समन्वय का स्वभाव होना चाहिए,२०१४ के पहले का विरोध का स्वभाव, पहले हम प्रभु नहीं थे अब प्रभु हो गए हैं लड़ने की आदत थी अब समन्वय का स्वभाव बनना चाहिए, शिवाजी का उदाहरण,कहीं पर लड़ना नहीं है यह विवेक जागृत करना पड़ेगा, आमने-सामने पड़ेंगे तब समन्वय का स्वभाव ताजा करना पड़ेगा 
१६.नए लोग भी आएंगे उनका प्रशिक्षण,बुद्धिमान श्रद्धा ,भक्ति तर्क दोनों को लेकर चलना पड़ेगा श्रद्धा और विश्वास के आधार पर अपनी तैयारी करके सब बातों को लेकर चलेंगे तो सब ठीक होगा 
व्यक्ति दोष युक्त हो तब भी छोड़ते नहीं है,समाज भी हमारे जैसा व्यवहार करने की इच्छा कर रहा है नागरिक अनुशासन पांच बातें
१७.विमर्श को अपने पक्ष में करना,उनका विमर्श अंदर से पोला है टिकने वाला नहीं है झूठ पर खड़ा है, हमारा आधार सत्य का है हम भी खड़ा करेंगे तो स्थाई और मजबूत होगा 
१८.दो धाराएं उनको संभालना ऐसे स्वयं को एवं परिवार को बनाना 
१९.विजय का विश्वास सतत परिश्रम करते चलें ,समूह में कैसे रहना,नियम व्यवस्था पालन 
२०.हमारा स्वयं का उदात्त क्या है अब  जो कार्य हमारे हाथ में हैं वह आसान नहीं है, अंतिम परीक्षा होती है वह कठिन होती,यहीं से फिसलने का भय रहता है,हमको आगे ही जाना है विजयी होंगे, योग्यता प्राप्त करें और ऐसे लोगों को खड़ा करें 
२१.समाज को दूसरी आशा नहीं है इसको चलाने के लिए हमारी तैयारी कितनी है ? एक एक स्वयंसेवक एक एक कुटुंब 
२२.जय-विजय की तैयारी करना है,हमने ऐसा बनाना और जिला स्तर के कार्यकर्ताओं को ऐसा बनाना इस काम को ठीक से करना 
२३.सत्य संकल्प हमारा है हमारी विजय है दुनिया के लिए दूसरा मार्ग नहीं है थोड़ा परिश्रम है किंतु फल अच्छा होगा......।

Thursday, March 30, 2023

यज्ञ में आहुति कैसे दी जाए 30/3/2023

यज्ञ में आहुति कैसे दी जाए। आहुति देते समय अपने सीधे हाथ के मध्यमों

 और अनामिका उगलियों पर सामग्री और अंगूठे का सहारा लेकर ग से उसे प्रज्वलित अग्नि में ही छोड़ा जाए हमेशा शुरू करना चाहिए यह भी इस तरह कि पूरी आहूति अग्नि में ही गिरे। जब आहुति डाली जा रही हो सभी सब एक साथ 'स्वाहा' बोलें स्वाद अग्निदेव की पत्नी है। देव आह्वान के निमित्त मंत्र पाठ करते हुए स्वाहा का उच्चारण कर निर्धारित हवन सामग्री का भोग अग्नि के माध्यम से देवताओं को पहुंचाते हैं। हवन अनुष्ठान की ये आखिरी और सबसे महत्वपूर्ण क्रिया है। कोई भी यह तब तक सफल नहीं माना जा सकता है जब तक कि विका ग्रहण देवता न कर से, किंतु देवता ऐसा हविष्य तभी स्वीकार कर सकते हैं जबकि अग्नि के द्वारा 'स्वाहा' के माध्यम से अर्पण किया जाए। श्रीमद्भागवत महापुराण के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं 'स्वाहा को यह दिया था कि उसी के माध्यम से देवता ग्रहण कर पाएंगे जीय प्रयोजन तभी पूरा होता है जब आह्वान किए गए देवता को उनको रथ का भोग पहुँचा दिया जाय की याजिक सामग्रियों में मीठे पदार्थ का भी शामिल किया जा सकता है





How to give oblations in Yagya.  middle of your right hand while offering oblations

 And with the help of thumb and material on the ring finger fingers, it should be released into the burning fire itself, it should always be started in such a way that the whole oblation falls into the fire itself.  When the oblation is being put, everyone should say 'Swaha' together. Taste is the wife of Agnidev.  While reciting the mantras for invoking the deities, chanting Swaha, the offerings of the prescribed Havan material are delivered to the deities through fire.  This is the last and most important act of the Havan ritual.  No one can consider it successful unless Vika is accepted by the deity, but the deity can accept such a prediction only if it is offered through 'Swaha' by Agni.  According to Shrimad Bhagwat Mahapuran, Lord Shri Krishna himself had given 'Swaha' that through him the deity would be able to receive the soul.  have to join.

 A contented creature is 'wealthy'.

 सन्तुष्ट प्राणी ही 'धनवान' है।


घर में सुख व शान्ति के लिए 30/3/2023

घर में सुख व शान्ति के लिए अपनाएं निम्नलिखित वास्तु सुझाव

 1. वास्तु वास्तु अनुसार रसाई प्लाट के अग्निकोण में बनानी चाहिए और रसोई के अग्निकोण में खाना पकाने के साथमा माइक्रोवेव हीटर आदि रखने चाहिए। रसोई घर ईशान में नहीं होना चाहिए और नहीं रसोई में ईशान में चूल्हा हो। ईशान में पीने का पानी में सिंक होना चाहिए। 2. मुखिया का कमरा: घर के मुखिया को नै में अपना कमरा बनाना चाहिए। मुखिया प्रभावशाली रहेगा।

 अगर नौकर (काम करने वालों का कमरा में होगा तो कर्मचारी आप पर हाथी रहेंगे। कमरे में पलंग |

 इस प्रकारों को सिर दक्षिण व पैर उत्तर को रहें। सिर पूर्व में भी रखा जा सकता है परन्तु सिर उत्तर की

 तरफ भूल कर भी न करें।

 3. मुख्य द्वार (दरवाजा) अन्य दरवाजों से बड़ा होना चाहिए और मुख्य द्वार में प्रयास कर देहरी अवश्य बनाएं। मुख्यद्वार पूर्व उत्तर अथवा ईशान में बनाना शुभ होता है परन्तु ईशान का द्वार तो हो होता है। 4. घर में टूटी फूटी का पुराना सामान खराब मशीन, बिगड़ा इलैक्ट्रानिक्स का सामान न रखें इसे तुरंत बादी को दे दें। पैसे देकर भी इसे हटाना पड़े तो हटा दें। घर से जल की निकासी पूर्व उत्तर या ईशान में शुभ होती है। अगर वास्तु दोष दूर करना संभव न हो तो वास्तु देव को प्रसन्न करने के लिए वास्तु दोष निवारण का अनुष्ठान करा कर काफी हद तक लाभ प्राप्त किया जा सकता है।



 तृष्णाग्रस्त व्यक्ति दरिद्र' है।


Follow the following Vastu tips for happiness and peace at home

 1. According to Vastu, the kitchen should be made in the fire corner of the plot and along with cooking, microwave heaters etc. should be kept in the fire corner of the kitchen. The kitchen should not be in the north-east and the kitchen should not have a stove in the north-east. There should be a sink in drinking water in Ishan. 2. Head's room: The head of the household should make his own room in the Nai. The chief will be influential.

 If the servant is in the worker's room then the worker will be elephant on you. Bed in the room.

 These types should keep their head towards south and feet towards north. The head can also be kept in the east but the head should be in the north.

 Don't do it even by mistake.

 3. The main door should be bigger than other doors and make efforts in the main door to make Dehri. It is auspicious to make the main door in the east, north or north-east, but there should be a door in the north-east. 4. Don't keep old broken items, damaged machines, damaged electronics in the house, give it to the badi immediately. If you have to remove it even after giving money, then remove it. Drainage of water from the house is auspicious in the north-east or north-east. If it is not possible to remove Vastu Dosha, then to please Vastu Dev, a Vastu Dosha Nivaran ritual can be beneficial to a great extent.



 A person who is thirsty is poor.

दिशाशूल 30/3/2023

दिशाशूल 
 शनिवार को पूर्व की सामवार को दक्षिणपूर्व को गुरुवार को दक्षिण की बुवार को पश्चिमको को पश्चिमको शुक्रवार को उत्तरपश्चिम की मंगलवार को उत्तर की कार का उत्तरपूर्वको यात्र होती है। अतः उत दिनों में वर्णित दिशाओं को करें सिंहान्द्रपूर्वकर का दक्षिण में मिथुन-तुका पश्चिम में तथा कक वृश्चिक-मीन का चन्द्रमा उत्तरदिशा में रहता है। साओं में सम्मुख चन्द्रमा से धनलाभ, दाहिने चन्द्रमा से सुख सम्पत्ति पीठ के चन्द्रमा में शोकसन्ताप बाएँ चन्द्रमा से धननाश होता है ध्यान रहे पूर्व से पूर्व सम्मुख दक्षिण दाहिनी पश्चिम पीछे तथा उत्तर बाएँ होगी। ऐसे ही सभी दिशाओं में समझना चाहिए। पुण्य-अश्विनी मृगशिरा नक्षत्र तथा कन्या मिथुन-मकर-तुला लग्नों में सभी दिशाओं की यात्रा शुभ होती है। (शिशु 58-02 10-1111 एक ही दिन में कहाँ जाकर सीटने वालों पर ये नियम लागू नहीं होती घर से निकलते हुए दर्पण एवं इष्टदेव की छवि का दर्शनकर भगवान विष्णु एवं उनके बारह महाभागवतों का स्मरण करके निकलना चाहिए.

 वनमाली गदी शाङ्गी शंखी चक्री व नन्दको श्रीमान् नारायणो विष्णु वासुदेवोऽभिरक्षतु ॥ ॐ वामनाय नमः । ॐ त्रिविक्रमाय नमः ॐ माधवाय नमः। प्रहलाद नारद- पराशर पुण्डरीक व्यासाम्बरीष शुक- शौनक भीष्म दालभ्यान् । रुक्मांग - दार्जुन वसिष्ठ- विभीषणादीन् पुण्यान् इमान परम-भागवतान् नमामि ॥

 पुरुषार्थहीन प्राणी 'मृत है।

disoriented 

 On Saturday, East, Monday, Southeast, Thursday, South, Monday, West, Friday, Northwest, Tuesday, North car travels to Northeast. Therefore, do the directions described in those days, in the south, Gemini-Tuka is in the south and the moon of Scorpio-Pisces is in the north direction. In Saaon, money is gained from the moon in front, happiness and wealth from the right moon, grief and sorrow from the left moon, money is lost from the left moon, keep in mind that from east to east, south will be right, west behind and north left. Similarly, it should be understood in all directions. Traveling in all directions is auspicious in Punya-Ashwini Mrigashira Nakshatra and Virgo-Gemini-Capricorn-Libra ascendants. (Shishu 58-02 10-1111 This rule does not apply to those who go and sit somewhere in a single day. While coming out of the house, seeing the mirror and the image of the presiding deity, one should remember Lord Vishnu and his twelve Mahabhagwats.

 Vanmali Gadi Shangi Shankhi Chakri and Nandko Shriman Narayano Vishnu Vasudevoऽभिरक्षतु॥ Om Vamanaya Namah. Om Trivikramaya Namah Om Madhavaya Namah. Prahlad Narad-Parashar Pundrik Vyasambreesh Shuk-Shaunak Bhishma Dalbhyan. Rukmang - Darjun Vasishtha - Vibhishanadin Punyaan Imaan Param-Bhagwatan Namami ॥

 An effortless creature is 'dead'.