Friday, March 31, 2023

मोहन भागवत जी संबोधन 1/4/2023

*समापन सत्र-परम पूजनीय सरसंघचालक जी*
१.डॉ हेडगेवार जी ने प्रारंभ में ही पूर्ण स्वतंत्रता का लक्ष्य रखा था संपूर्ण स्वतंत्रता की यात्रा पूर्ण स्वतंत्रता प्राप्त करना है,इसको प्राप्त करने के लिए भारत को खड़ा करना है
२.हम अब हम इतने बड़े हो गए हैं कि संपूर्ण स्वतंत्रता और विश्व पर हमारा प्रभाव दिखने लगा है 
३.उपनिषद की कथा- एक वृक्ष पर एक जीव फल खा रहा है दूसरा मित्र देख रहा है, यह धारा चलती रहेगी,केवल आत्मा परमात्मा से सृष्टि नहीं चलती सारी प्रकृति को संभालना है तो हमने जो किया है उसे और शक्ति चाहिए 
४.बाहर की चीजों को संभालने के लिए समाज में स्थिति एवं रचना उत्पन्न करना बदनाम करने की प्रवृत्ति से निपटने के लिए समाज को भी तैयार करना 
सारे समाज को आत्मीयता चाहिए सेवा आदि के माध्यम से समाज का प्रबोधन करना
५.हम क्या है क्या होना चाहिए  चुनौतियां क्या क्या है समाधान में हमारे क्या भूमिका हो इस काम की एक प्रकृति है, दूसरा काम उसका प्रकार ओर पद्धति भी अलग है, यह दोनों जुड़े हैं 
६.जीव है इसलिए आत्मा है ये चाहकर भी अलग नहीं हो सकते पूर्ण भिन्न फिर भी दोनों की धाराओं को संभाल कर चलना
७.जिला स्तर तक के कार्यकर्ता के मन में अंतर स्पष्ट होना चाहिए अभी नहीं है 
८.हमारी सामूहिक पद्धति है पहले हम सब समझने वाली बातों को ठीक ढंग से सुने समझें,छोटी-  छोटी बातें रास्ते से हटा देती है 
९.पुरानी एवं शाश्वत बातें स्थाई है कुछ को हटाना पड़ता है कुछ को जोड़ना पड़ता है,नित्यानित्य विवेक हमको समझना पड़ेगा तब समझकर नीचे उतरेगा 
१०.अब हम छुप नहीं सकते दुनिया हमको दिखाएगी ,अब समुत्कर्ष महाविद्यालय शिविर नाम देना पड़ता है क्यों ? नए-नए विचित्र नाम क्यों देना, दिखने के लिए होंगे तो दिखे जाएंगे,दिखने से परे जाकर संगठन श्रेणी के काम करने की आवश्यकता
११.समाज के जितने प्रकार हैं उनमें हमको काम खड़ा करना पड़ेगा प्रांत भाषा क्षेत्र सब स्तर पर,सर्वस्पर्शी काम हो 
१२.मनुष्य निर्माण- शाखा में १३ सूर्य नमस्कार, वही नहीं रुकना रुक जाएगा तो अच्छा कार्यकर्ता नहीं बन सकता, उंगली से चांद दिखाना उंगली ही नहीं देखते रहना, इन सब में से कार्यकर्ता कैसा बन रहा है,मित्र बनाने की कला होना चाहिए
१३.सब लोगों को साथ जोड़ने की कला अपनी दृष्टि ऐसी बनानी पड़ेगी लेकिन उसकी दृष्टि सब को अपना बनाने की नहीं बन रही है मन की आत्मीयता होते हुए प्रगति को संभालना,मित्र बनाने वाले स्वयंसेवक खड़ा करेंगे करना उसको जानकारी,विवेक होना चाहिए 
१४.राम कृष्ण परशुराम बुद्ध देश काल परिस्थिति के अनुसार आचरण,सामने वाला कैसा है उसके आधार पर आचरण इसका विवेक इसलिए स्पीड लिटरेस दोनों का संतुलन,जो दुनिया में से रास्ता निकाल सके ऐसी बातों को समझने और समझकर चलेंगे तो सब ठीक होगा 
१५.इसलिए समन्वय का स्वभाव होना चाहिए,२०१४ के पहले का विरोध का स्वभाव, पहले हम प्रभु नहीं थे अब प्रभु हो गए हैं लड़ने की आदत थी अब समन्वय का स्वभाव बनना चाहिए, शिवाजी का उदाहरण,कहीं पर लड़ना नहीं है यह विवेक जागृत करना पड़ेगा, आमने-सामने पड़ेंगे तब समन्वय का स्वभाव ताजा करना पड़ेगा 
१६.नए लोग भी आएंगे उनका प्रशिक्षण,बुद्धिमान श्रद्धा ,भक्ति तर्क दोनों को लेकर चलना पड़ेगा श्रद्धा और विश्वास के आधार पर अपनी तैयारी करके सब बातों को लेकर चलेंगे तो सब ठीक होगा 
व्यक्ति दोष युक्त हो तब भी छोड़ते नहीं है,समाज भी हमारे जैसा व्यवहार करने की इच्छा कर रहा है नागरिक अनुशासन पांच बातें
१७.विमर्श को अपने पक्ष में करना,उनका विमर्श अंदर से पोला है टिकने वाला नहीं है झूठ पर खड़ा है, हमारा आधार सत्य का है हम भी खड़ा करेंगे तो स्थाई और मजबूत होगा 
१८.दो धाराएं उनको संभालना ऐसे स्वयं को एवं परिवार को बनाना 
१९.विजय का विश्वास सतत परिश्रम करते चलें ,समूह में कैसे रहना,नियम व्यवस्था पालन 
२०.हमारा स्वयं का उदात्त क्या है अब  जो कार्य हमारे हाथ में हैं वह आसान नहीं है, अंतिम परीक्षा होती है वह कठिन होती,यहीं से फिसलने का भय रहता है,हमको आगे ही जाना है विजयी होंगे, योग्यता प्राप्त करें और ऐसे लोगों को खड़ा करें 
२१.समाज को दूसरी आशा नहीं है इसको चलाने के लिए हमारी तैयारी कितनी है ? एक एक स्वयंसेवक एक एक कुटुंब 
२२.जय-विजय की तैयारी करना है,हमने ऐसा बनाना और जिला स्तर के कार्यकर्ताओं को ऐसा बनाना इस काम को ठीक से करना 
२३.सत्य संकल्प हमारा है हमारी विजय है दुनिया के लिए दूसरा मार्ग नहीं है थोड़ा परिश्रम है किंतु फल अच्छा होगा......।

Thursday, March 30, 2023

यज्ञ में आहुति कैसे दी जाए 30/3/2023

यज्ञ में आहुति कैसे दी जाए। आहुति देते समय अपने सीधे हाथ के मध्यमों

 और अनामिका उगलियों पर सामग्री और अंगूठे का सहारा लेकर ग से उसे प्रज्वलित अग्नि में ही छोड़ा जाए हमेशा शुरू करना चाहिए यह भी इस तरह कि पूरी आहूति अग्नि में ही गिरे। जब आहुति डाली जा रही हो सभी सब एक साथ 'स्वाहा' बोलें स्वाद अग्निदेव की पत्नी है। देव आह्वान के निमित्त मंत्र पाठ करते हुए स्वाहा का उच्चारण कर निर्धारित हवन सामग्री का भोग अग्नि के माध्यम से देवताओं को पहुंचाते हैं। हवन अनुष्ठान की ये आखिरी और सबसे महत्वपूर्ण क्रिया है। कोई भी यह तब तक सफल नहीं माना जा सकता है जब तक कि विका ग्रहण देवता न कर से, किंतु देवता ऐसा हविष्य तभी स्वीकार कर सकते हैं जबकि अग्नि के द्वारा 'स्वाहा' के माध्यम से अर्पण किया जाए। श्रीमद्भागवत महापुराण के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं 'स्वाहा को यह दिया था कि उसी के माध्यम से देवता ग्रहण कर पाएंगे जीय प्रयोजन तभी पूरा होता है जब आह्वान किए गए देवता को उनको रथ का भोग पहुँचा दिया जाय की याजिक सामग्रियों में मीठे पदार्थ का भी शामिल किया जा सकता है





How to give oblations in Yagya.  middle of your right hand while offering oblations

 And with the help of thumb and material on the ring finger fingers, it should be released into the burning fire itself, it should always be started in such a way that the whole oblation falls into the fire itself.  When the oblation is being put, everyone should say 'Swaha' together. Taste is the wife of Agnidev.  While reciting the mantras for invoking the deities, chanting Swaha, the offerings of the prescribed Havan material are delivered to the deities through fire.  This is the last and most important act of the Havan ritual.  No one can consider it successful unless Vika is accepted by the deity, but the deity can accept such a prediction only if it is offered through 'Swaha' by Agni.  According to Shrimad Bhagwat Mahapuran, Lord Shri Krishna himself had given 'Swaha' that through him the deity would be able to receive the soul.  have to join.

 A contented creature is 'wealthy'.

 सन्तुष्ट प्राणी ही 'धनवान' है।


घर में सुख व शान्ति के लिए 30/3/2023

घर में सुख व शान्ति के लिए अपनाएं निम्नलिखित वास्तु सुझाव

 1. वास्तु वास्तु अनुसार रसाई प्लाट के अग्निकोण में बनानी चाहिए और रसोई के अग्निकोण में खाना पकाने के साथमा माइक्रोवेव हीटर आदि रखने चाहिए। रसोई घर ईशान में नहीं होना चाहिए और नहीं रसोई में ईशान में चूल्हा हो। ईशान में पीने का पानी में सिंक होना चाहिए। 2. मुखिया का कमरा: घर के मुखिया को नै में अपना कमरा बनाना चाहिए। मुखिया प्रभावशाली रहेगा।

 अगर नौकर (काम करने वालों का कमरा में होगा तो कर्मचारी आप पर हाथी रहेंगे। कमरे में पलंग |

 इस प्रकारों को सिर दक्षिण व पैर उत्तर को रहें। सिर पूर्व में भी रखा जा सकता है परन्तु सिर उत्तर की

 तरफ भूल कर भी न करें।

 3. मुख्य द्वार (दरवाजा) अन्य दरवाजों से बड़ा होना चाहिए और मुख्य द्वार में प्रयास कर देहरी अवश्य बनाएं। मुख्यद्वार पूर्व उत्तर अथवा ईशान में बनाना शुभ होता है परन्तु ईशान का द्वार तो हो होता है। 4. घर में टूटी फूटी का पुराना सामान खराब मशीन, बिगड़ा इलैक्ट्रानिक्स का सामान न रखें इसे तुरंत बादी को दे दें। पैसे देकर भी इसे हटाना पड़े तो हटा दें। घर से जल की निकासी पूर्व उत्तर या ईशान में शुभ होती है। अगर वास्तु दोष दूर करना संभव न हो तो वास्तु देव को प्रसन्न करने के लिए वास्तु दोष निवारण का अनुष्ठान करा कर काफी हद तक लाभ प्राप्त किया जा सकता है।



 तृष्णाग्रस्त व्यक्ति दरिद्र' है।


Follow the following Vastu tips for happiness and peace at home

 1. According to Vastu, the kitchen should be made in the fire corner of the plot and along with cooking, microwave heaters etc. should be kept in the fire corner of the kitchen. The kitchen should not be in the north-east and the kitchen should not have a stove in the north-east. There should be a sink in drinking water in Ishan. 2. Head's room: The head of the household should make his own room in the Nai. The chief will be influential.

 If the servant is in the worker's room then the worker will be elephant on you. Bed in the room.

 These types should keep their head towards south and feet towards north. The head can also be kept in the east but the head should be in the north.

 Don't do it even by mistake.

 3. The main door should be bigger than other doors and make efforts in the main door to make Dehri. It is auspicious to make the main door in the east, north or north-east, but there should be a door in the north-east. 4. Don't keep old broken items, damaged machines, damaged electronics in the house, give it to the badi immediately. If you have to remove it even after giving money, then remove it. Drainage of water from the house is auspicious in the north-east or north-east. If it is not possible to remove Vastu Dosha, then to please Vastu Dev, a Vastu Dosha Nivaran ritual can be beneficial to a great extent.



 A person who is thirsty is poor.

दिशाशूल 30/3/2023

दिशाशूल 
 शनिवार को पूर्व की सामवार को दक्षिणपूर्व को गुरुवार को दक्षिण की बुवार को पश्चिमको को पश्चिमको शुक्रवार को उत्तरपश्चिम की मंगलवार को उत्तर की कार का उत्तरपूर्वको यात्र होती है। अतः उत दिनों में वर्णित दिशाओं को करें सिंहान्द्रपूर्वकर का दक्षिण में मिथुन-तुका पश्चिम में तथा कक वृश्चिक-मीन का चन्द्रमा उत्तरदिशा में रहता है। साओं में सम्मुख चन्द्रमा से धनलाभ, दाहिने चन्द्रमा से सुख सम्पत्ति पीठ के चन्द्रमा में शोकसन्ताप बाएँ चन्द्रमा से धननाश होता है ध्यान रहे पूर्व से पूर्व सम्मुख दक्षिण दाहिनी पश्चिम पीछे तथा उत्तर बाएँ होगी। ऐसे ही सभी दिशाओं में समझना चाहिए। पुण्य-अश्विनी मृगशिरा नक्षत्र तथा कन्या मिथुन-मकर-तुला लग्नों में सभी दिशाओं की यात्रा शुभ होती है। (शिशु 58-02 10-1111 एक ही दिन में कहाँ जाकर सीटने वालों पर ये नियम लागू नहीं होती घर से निकलते हुए दर्पण एवं इष्टदेव की छवि का दर्शनकर भगवान विष्णु एवं उनके बारह महाभागवतों का स्मरण करके निकलना चाहिए.

 वनमाली गदी शाङ्गी शंखी चक्री व नन्दको श्रीमान् नारायणो विष्णु वासुदेवोऽभिरक्षतु ॥ ॐ वामनाय नमः । ॐ त्रिविक्रमाय नमः ॐ माधवाय नमः। प्रहलाद नारद- पराशर पुण्डरीक व्यासाम्बरीष शुक- शौनक भीष्म दालभ्यान् । रुक्मांग - दार्जुन वसिष्ठ- विभीषणादीन् पुण्यान् इमान परम-भागवतान् नमामि ॥

 पुरुषार्थहीन प्राणी 'मृत है।

disoriented 

 On Saturday, East, Monday, Southeast, Thursday, South, Monday, West, Friday, Northwest, Tuesday, North car travels to Northeast. Therefore, do the directions described in those days, in the south, Gemini-Tuka is in the south and the moon of Scorpio-Pisces is in the north direction. In Saaon, money is gained from the moon in front, happiness and wealth from the right moon, grief and sorrow from the left moon, money is lost from the left moon, keep in mind that from east to east, south will be right, west behind and north left. Similarly, it should be understood in all directions. Traveling in all directions is auspicious in Punya-Ashwini Mrigashira Nakshatra and Virgo-Gemini-Capricorn-Libra ascendants. (Shishu 58-02 10-1111 This rule does not apply to those who go and sit somewhere in a single day. While coming out of the house, seeing the mirror and the image of the presiding deity, one should remember Lord Vishnu and his twelve Mahabhagwats.

 Vanmali Gadi Shangi Shankhi Chakri and Nandko Shriman Narayano Vishnu Vasudevoऽभिरक्षतु॥ Om Vamanaya Namah. Om Trivikramaya Namah Om Madhavaya Namah. Prahlad Narad-Parashar Pundrik Vyasambreesh Shuk-Shaunak Bhishma Dalbhyan. Rukmang - Darjun Vasishtha - Vibhishanadin Punyaan Imaan Param-Bhagwatan Namami ॥

 An effortless creature is 'dead'.

मंत्र नवग्रह

सूर्य

 :

 ॐ

 ह्रां

 ह्रीं

 ह्रीं

 सः

 सूर्याय नमः

 चन्द्र

 ॐ

 श्रीं

 श्रीं

 श्रीं

 सः

 चन्द्राय

 नमः

 मंगल

 ॐ

 क्रां

 क्रीं

 क्रौं

 सः

 भौमाय नमः

 बुध

 ॐ

 ब्रां

 ब्रीं

 ब्रौं

 सः

 बुधाय नमः

 गुरु

 :

 ॐ

 ग्रां

 ग्रीं

 ग्रौं

 सः

 गुरवे नमः

 शुक्र

 :

 ॐ

 द्रां

 द्रीं

 द्रौं

 सः

 शुक्राय नमः

 शनि

 :

 ॐ

 प्रां

 प्रीं

 प्रौं

 सः शनये नमः

 राहु

 :

 ॐ

 भ्रां

 भ्रीं

 भ्रौं

 सः

 राहवे नमः

 केतु

 ॐ

 प्रां

 प्रीं

 प्रौं

 सः

 केतवे नमः

 हितोपदेष्टा ही 'गुरु' है।

भागवतम् चतुःश्लोकि भागवतम् 30/3/2023

चतुःश्लोकि भागवतम्

 चतुःश्लोकि भागवतम्

 अहमेवासमेवाग्रे नान्यद्यत्सदसत्परम्।
 पश्चादहं यदेतच्च योऽवशिष्येत सोऽस्म्यहम् 11111
 ऋतेऽर्थं यत् प्रतीयेत न प्रतीयेत चात्मनि। तद्विद्यादात्मनो मायां यथाऽऽभासो यथा तमः 11211 
यथा महान्ति भूतानि भूतेषूच्चावचेष्वनु। प्रविष्टान्यप्रविष्टानि तथा तेषु न तेष्वहम् 113।। 
एतावदेव जिज्ञास्यं तत्वजिज्ञासुनाऽऽत्मनः । अन्वयव्यतिरेकाभ्यां यत् स्यात् सर्वत्र सर्वदा 11411।


Chatushloki Bhagavatam

 Ahmevasmevagre nanyadyatsadasatparam.
 पश्चाधाहं यदेतच योऽवाशिष्येत सोऽस्म्यहम 11111 रीतेऽर्थं यत प्रतीयेत न प्रतीयेत चात्मणि। Tadvidyadatmano Maya Yatha'bhaso Yatha Tamah 11211 Yatha Mahanti Bhutani Bhutesuchavachesvanu. 113. Entry Pravishtani and Teshu no Teshwaham. Etavdev Jigyasya Tatvajigyasuna'atmanah. अन्वयव्यतिरेकाभ्यां यत स्यात सर्वत्र सर्वदा 11411

गुरु और शुक्र का अस्त होना (जिसे तारा डुबना भी कहा जाता है)

गुरु-शुक्रास्त में वर्जित कर्म

 गुरु और शुक्र का अस्त होना (जिसे तारा डुबना भी कहा जाता है) भारतीय ज्योतिष में गुरु एवं शुक ग्रह को तारा माना गया है, इनके अस्त हो जाने पर भारतीय ज्योतिष शास्त्र किसी भी नर-नारी के विवाह को अनुमति नहीं देता और न ही किसी उत्तम मांगलिक कार्य की निम्नांकित शुभ कार्यों को शास्त्र वचनानुसार निषिद्ध एवं त्याज्य माना गया है-गृहारम्भ, गृह प्रवेश, कुआँ तालाब का निर्माण, व्रतारम्भ, व्रतोद्यापन, नामकरण, मुण्डन, कर्णवेध, यज्ञोपवीत सगाई विवाह व गृह प्रवेश, गोदान, देवप्रतिष्ठा (मूर्ति स्थापना) चातुर्मास्य प्रयोग, अग्निहोत्र (यज्ञ) प्रारम्भ, सकाम अनुष्ठान, यात्रा, दीक्षा, संन्यास ग्रहण आदि। तारा अस्त होने से पहले तीन दिनों का वृद्धत्व दोष एवं उदित होने के बाद तीन दिनों का बाल्यत्व दोष होता है।

 जहाँ मन शुद्ध रहे, वही 'तीर्थ' है।


Forbidden deeds in Guru-Shukrast

 The setting of Jupiter and Venus (which is also known as Tara Dipna) In Indian astrology, Jupiter and Venus are considered as stars, after their setting, Indian astrology does not allow the marriage of any male and female. The following auspicious works of an auspicious auspicious work have been considered prohibited and discarded according to the scriptures - home beginning, house warming, construction of well pond, fasting, fasting, naming, shaving, Karnavedh, Yajnopavit engagement marriage and house warming, Godan, Devapratishtha (idol Establishment) Chaturmasya experiment, Agnihotra (Yajna) start, Sakam ritual, Yatra, Diksha, Sannyas eclipse etc. Before the star sets, there is old age defect for three days and after rising, there is childish defect for three days.

 Where the mind remains pure, that is the 'pilgrimage'.

Wednesday, March 29, 2023

One Shloki Durga Saptshati very important MANTRA 30/3/2023

एक श्लोकी दुर्गासप्तशती

 या अंबा मधुकैटभ प्रमथिनी या माहिषोन्यूलिनी। या धूम्रेक्षण चण्ड मुण्ड मथिनी या रक्तबीजाशिनी। शक्ति: शुंभ निशुंभ दैत्य दलिनी, या सिद्धलक्ष्मी: परा सादुर्गा नवकोटि विश्व सहिता, माम् पातु विश्वेश्वरी।

,

 गुरु और वेद की बात सदा सुनें।

One Shloki Durga Saptshati

 Or Amba Madhukaitabh Pramthini or Mahishonulini. Or Dhumrekshan Chand Mund Mathini or Raktabijashini. Shakti: Shumbha Nishumbha Daitya Dalini, or Siddhalakshmi: Para Sadurga Navkoti Vishwa Sahitha, Maam Patu Vishweshwari.



 Always listen to Guru and Vedas.

तुलसी तोड़ने के नियम व मंत्र03073/2023

तुलस्यमृतजन्मासि सदा त्वं केशवप्रिय। चिनेमि केशवस्यार्थे वरदा भव शोभने 


विधान इस प्रकार से प्रार्थना करके वर्जित दिनों को छोड़कर तुलसी पत्तियों के साथ अग्रभ तोड़ना चाहिये। अर्थात् एक-एक पत्ता न तोड़कर दल तोड़ना चाहिये। वर्जित दिन (जिसमें ना ना चाहिये) रवि, मंगल एवं शुक्रवार, द्वादशी, अमावस्या पूर्णिमा एवं संक्रान्ति, जन्म एवं मर पाठक) रात्रि एवं दोनों सन्ध्याओं में भी तुलसीदल न तोड़ें। वैधृति एवं व्यतीपात योगों में भ मन तो निषिद्ध समय में तुलसी वृक्ष से स्वयं गिरी हुई पत्ती से पूजा करें। शालिग्राम पूजा निषिद्ध तिथियों में भी तुलसीदल तोड़ा जा सकता है।



 कंचन और कामिनी सदा 'त्याज्य' हैं


Tulsymrut Janmasi is always loved by Keshav. Chinemi keshavsyarthe varada bhava shobha vidhan, praying in this way, the forehead should be broken with Tulsi leaves except on forbidden days. That is, instead of breaking each leaf, the group should be broken. Forbidden days (which do not require Sun, Tuesday and Friday, Dwadashi, Amavasya Purnima and Sankranti, birth and death reader) do not pluck Tulsi plant at night and in both the evenings. In Vaidhriti and Vyatipat Yogas, if you have a mind, worship yourself with a leaf that has fallen from the Tulsi tree in prohibited times. Tulsidal can be plucked even on Shaligram Puja prohibited dates.

 Kanchan and Kamini are always 'discarded'

sanatani Savitri 34 rule of life 30/3/2023

सनातनसावित्री

 सत्य, समता, सन्तोष, सरलता, तेज, दया, विवेक, त्याग, शुद्धि, धृति, क्षमा, राम (मनोनिग्रह) दम (इन्द्रियनिग्रह), यज्ञ तथा अद्रोह, अनुग्रह और दानरूप शील, तप, राष्ट्ररक्षा, अस्तित्वरक्षा आदर्शरक्षा, गोरक्षा, आर्तसेवा , मातृसेवा, पितृसेवा, आचार्यसेवा, अतिथिसत्कार, स्वाध्याय ईशभक्ति, आत्मज्ञान सर्वात्मभाव और अभय-ये बत्तीस श्रुतिस्मृतिपुराणोक्त और सत्पुरुषों द्वारा आचरित शुभ सार्वभौम सनातनधर्म है।

 चिन्ता ही 'ज्वर' है।

Sanatan Savitri

 Truth, equanimity, contentment, simplicity, sharpness, kindness, discretion, renunciation, purification, dhriti, forgiveness, Ram (Manonigraha), Dum (Indriyagraha), Yagya and Adroha, Grace and Charity, Modesty, Tenacity, National Defense, Survival, Ideal Defense, Cow Protection, Arteseva Mother service, father service, Acharya service, guest hospitality, self-study, devotion to God, self-knowledge, self-respect and fearlessness - these are the auspicious universal Sanatana Dharma practiced by the thirty-two Shrutismriti Puranokta and good men.

 Worry is the 'fever'.