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Thursday, February 2, 2023
AM PM
समयसूचक AM और PM का उदगम
भारत ही था। पर हमें बचपन से यह रटवाया गया, विश्वास दिलवाया गया कि इन दो शब्दों AM और PM का मतलब होता है :
AM : एंटी मेरिडियन (ante meridian)
PM : पोस्ट मेरिडियन (post meridian)
एंटी यानि पहले, लेकिन किसके?
पोस्ट यानि बाद में, लेकिन किसके?
अध्ययन करने से ज्ञात हुआ और हमारी प्राचीन संस्कृत भाषा ने इस संशय को अपनी आंधियों में उड़ा दिया और अब, सब कुछ साफ-साफ दृष्टिगत है।
कैसे?
देखिये...
AM = आरोहनम् मार्तण्डस्य Aarohanam Martandasya
PM = पतनम् मार्तण्डस्य Patanam Martandasya
----------------------------
सूर्य, जो कि हर आकाशीय गणना का मूल है, उसीको गौण कर दिया। अंग्रेजी के ये शब्द संस्कृत के उस 'मतलब' को नहीं इंगित करते जो कि वास्तव में है।
आरोहणम् मार्तण्डस्य Arohanam Martandasaya यानि सूर्य का आरोहण (चढ़ाव)।
पतनम् मार्तण्डस्य Patanam Martandasaya यानि सूर्य का ढलाव।
दिन के बारह बजे के पहले सूर्य चढ़ता रहता है - 'आरोहनम मार्तण्डस्य' (AM)।
बारह के बाद सूर्य का अवसान/ ढलाव होता है - 'पतनम मार्तण्डस्य' (PM)।
पश्चिम के
संघ गीत RSS SONG LYRICS
भारतमाता तेरी सेवा करदे जावांगे ..2
इक्क जनम नहीं बार बार तेरे सोहले गावांगे।
भारतमाता तेरी सेवा ...
पिछले इक्क हजार साल तां ‘संघर्षा विच बीते ..2’
हस्स-हस्स जाम शहीदी वाले ,‘तेरे बच्चयाँ पीते..2’
तैनूं फेर अखण्ड करांगे , जानां लावांगे।
भारतमाता तेरी सेवा ...
तेरी शान शौकत नूं माता ,‘फिर तों है चमकाउणा..2’
राम जन्मभूमि ते सुन्दर, ‘मन्दिर फेर बनाउणा..2’
विश्वगुरु दा तेरा दर्जा, फेर दिलावांगे।
भारतमाता तेरी सेवा ...
केशव हेडगेवार बीजिया,‘समरसता दा पौधा..2’
निस्वारथ एके दी खुशबू,‘जोड़े भारती जोधा..2’
भगवा झण्डा पिण्ड शहर लै, शाखा लावांगे ।
भारतमाता तेरी सेवा ...
प्रकृति भले विपरीत खड़ी हो,
कालचक्र भी पड़े थामना।
संकट के तूफानी सागर,
चीर करेंगे सफल सामना॥
सतत हमारी यही योजना,
नित्य हमारी यही साधना.....3 ॥धृ॥
हिन्दु धर्म की श्रेष्ठ आन पर,
है प्रहार अब छल-असत्य का।
किन्तु सजग निर्भय सधैर्य हो,
रखना सम्बल धर्म-कृत्य का ॥
अविरल जीवन चले जगत् में,
सृष्टि धर्म की यही कल्पना..2 ॥1॥
नए-नए ढंग विकसित होंगे,
नई-नई पद्धति आएंगी।
संस्कृति वही पुरानी अपनी,
जन-जीवन को सरसाएगी॥
चक्र-अखण्डित यही सृष्टि का,
यही सृजन की सहज धारणा ..2 ॥2॥
नित्य हमारी यही साधना .......
विघ्नों के गिरि अचल अनामिक,
कदम-कदम हर पग रोकेंगे।
भरी दुपहरी का रवि ग्रस ले,
ऐसे राहु-केतु डोलेंगे ॥
किन्तु अटल निर्बाध बढ़ें हम,
जीवन की गति सहज भावना..2 ॥3॥
नित्य हमारी यही साधना .......
सुख-दुख-विपदा-बाधा-सुविधा,
यही मार्ग मीलों के पत्थर।
किन्तु इसी में आनन्दित हो,
खोजें हम उन्नति के अवसर॥
विजय सुनिश्चित भरतभूमि की,
चाहे सागर पड़े बाँधना ..2 ॥4॥
नित्य हमारी यही साधना........
संघ सृष्टि इस कण्टक पथ की,
बीहड़ता की भी अभ्यासी।
दिखी लालिमा ध्येय-सूर्य की,
धैर्य परीक्षा अब है बाकी ॥
लाँघ चलें यत्नों की सीमा,
निश्चित होगी सफल कामना ॥5॥
नित्य हमारी यही साधना........
धन्य धन्य है, धन्य धन्य है, भारत भू की धूल।
यह भारत भू की धूल॥
इसी धूल में खेल-खेलकर, हुए थे वीर महान
इसी धूल में खेल बने थे, राम-कृष्ण भगवान
मल-मलकर मस्तक पर इसको, पाया रूप-अनूप।
यह भारत भू की धूल॥ धन्य धन्य है....
स्वर्ग में रहने वाले इसमें, खेलन को ललचाते
तीन लोक में इसकी महिमा, के गुण गाए जाते
पाकर इसको स्वर्गलोक के, सब सुख जाते भूल
यह भारत भू की धूल॥ धन्य धन्य है....
एक-एक कण इस धूली का, है अपने को प्यारा
एक-एक कण इस धूली का, है नयनों का तारा
मिट जाए यह और जिएं हम, यह न होगी भूल॥
यह भारत भू की धूल॥ धन्य धन्य है....
मिल-जुलकर नित शाम-सवेरे, हम इसके गुण गाते
और प्रेम के अमर-सूत्र में, हैं हम बंधते जाते
इसी धूल में हमें हमारे, सब दुख जाते भूल॥
यह भारत भू की धूल॥ धन्य धन्य है...
संस्कृति सबकी एक चिरंतन, खून रगों में हिन्दू है।
विराट सागर समाज अपना, हम सब इसके बिन्दू हैं ॥
संस्कृति सबकी......
राम कृष्ण गौतम की धरती, महावीर का ज्ञान यहाँ।
वाणी खंडन मंडन करती, शंकर के चारों धाम जहाँ ॥
जितने दर्शन राहें उतनी, चिन्तन का चैतन्य भरा।
पंथ खालसा गुरु पुत्रों की, बलिदानी यह पुण्य धरा ॥
अक्षयवट अगणित शाखाएं, जड़ में जीवन हिन्दू है।
संस्कृति सबकी......
कोटि हृदय हैं भाव एक है, इसी भूमि पर जन्म लिए।
मातृभूमि यह कर्मभूमि यह, पुण्यभूमि हित मरे जिए॥
हारे जीते संघर्षों में, साथ लड़े बलिदान हुए।
कालचक्र की मजबूरी में, रिश्ते-नाते बिखर गए।
एक बड़ा परिवार हमारा, पुरखे सबके हिन्दू हैं।
संस्कृति सबकी......
सबकी रक्षा धर्म करेगा, उसकी रक्षा आज करें।
वर्ग भेद मतभेद मिटाकर, नव रचना निर्माण करें ॥
धर्म हमारा जग में अभिनव, अक्षय है अविनाशी है।
इसी कड़ी से जुड़े हुए हम, युग से भारतवासी हैं ॥
थाह अथाह जहाँ की महिमा, गहरा जैसा सिन्धु है ॥
संस्कृति सबकी......
हरिजन गिरिजन-वासी वन के, नगर ग्राम सब साथ चलें।
ऊँच-नीच का भाव मिटाकर, समता के सद्भाव बढ़ें॥
ऊपर दिखते भेद भले हों, ज्यों बगिया के फूल खिले।
रंग-बिरंगी मुस्कानों को, जीवन रस पर एक मिले ॥
संजीवनी रस अमृत पीकर, मृत्युंजय हम हिन्दू हैं।
संस्कृति सबकी......
शत नमन माधव चरण में, शत नमन माधव चरण में,
शत नमन माधव चरण में, शत नमन माधव चरण में ॥
आपकी पीयूष वाणी, शब्द को भी धन्य करती
आपकी आत्मीयता थी, युगल नयनों से बरसती
और वह निश्चल हंसी जो, गूंज उठती थी गगन में ॥ शत नमन ....
ज्ञान में तो आप ऋषिवर, दीखते थे आद्य शंकर
और भोला भाव शिशु सा, खेलता मुख पर निरन्तर
दीन दुखियों के लिए थी, द्रवित करुणा धार मन में ॥ शत नमन ....
दु:ख सुख निन्दा प्रशंसा, आपको सब एक ही थे
दिव्य गीता ज्ञान से युत, आप तो स्थित प्रज्ञा ही थे
भरत भू के पुत्र उत्तम, आप थे युगपुरुष जन में ॥ शत नमन ....
मेरु गिरि सा मन अडिग था, आपने पाया महात्मन
त्याग कैसा आपका वह, तेज साहस शील पावन
मात्र दर्शन भस्म कर दे, घोर षडरिपु एक क्षण में ॥ शत नमन ....
सिन्धु सा गंभीर मानस, थाह कब पाई किसी ने
आ गया सम्पर्क में जो, धन्यता पाई उसी ने
आप योगेश्वर नए थे, छल भरे कुरुक्षेत्र रण में ॥ शत नमन ....
आँधी क्या है तूफान मिलें, चाहे जितने व्यवधान मिलें,
बढ़ना ही अपना काम है, बढ़ना ही अपना काम है ।।
हम नई चेतना की धारा, हम अंधियारे में उजियारा,
हम उस बयार के झोंके हैं, जो हर ले जग का दुःख सारा।
चलना है शूल मिलें तो क्या, पथ में अंगार जलें तो क्या,
जीवन में कहाँ विराम है, बढ़ना ही अपना काम है ॥1॥
आँधी क्या है....
हम अनुगामी उन पाँवों के, आदर्श लिए जो बढ़े चले,
बाधाएँ जिन्हें डिगा न सकीं, जो संघर्षों में अड़े रहे।
सिर पर मंडरता काल रहे, करवट लेता भूचाल रहे,
पर अमिट हमारा नाम है, बढ़ना ही अपना काम है ॥2॥
आँधी क्या है....
वह देखो पास खड़ी मंजिल, इंगित से हमें बुलाती है,
साहस से बढ़ने वालों के, माथे पर तिलक लगाती है।
साधना न व्यर्थ कभी जाती, चलकर ही मंजिल मिल पाती,
फिर क्या बदली क्या धाम है, बढ़ना ही अपना काम है ॥3॥
आँधी क्या है....
रक्त शिराओं में राणा का, रह रह आज हिलोरे लेता।
मातृभूमि का कण-कण तृण-तृण, हमको आज निमंत्रण देता॥
वीर प्रसूता भारत माँ की, हम सब हिन्दू हैं सन्तानें
हर विपदा जो माँ पर आती, सहते हैं हम सीना ताने
युग-युग की निद्रा को तजकर, फिर है अपना गौरव चेता ॥1॥
मातृभूमि का....
यह वह भूमि जहाँ पर नित नित, लगता बलिदानों का मेला
इस धरती के पुत्रों ने ही, हँस-हँस महामृत्यु को झेला
हमको डिगा न पाया कोई, अगणित आए विश्व-विजेता ॥2॥
मातृभूमि का....
आज पुनः आक्रान्त हुई है, मातृभूमि हम सबकी प्यारी
उठो चुनौती को स्वीकारें, युवकों आज हमारी बारी
सीमाओं पर अरिदल देखो, हमको पुनः चुनौती देता ॥3॥
मातृभूमि का....
रक्त शिराओं में ........
सब देशों से न्यारा है, प्यारा देश हमारा देश।
सब देशों से न्यारा है, प्यारा देश हमारा देश।
जहाँ पर बहती पावन- नीरा, ब्रह्मपुत्र की प्रचण्ड धारा।
गंगा का तो जन्म-स्थल, प्यारा देश, हमारा देश ।।
सब देशों से......
जिस धरती पर जन्म लिया, जिस पर पलकर बड़े हुए।
जननी से भी है बढ़ कर, प्यारा देश हमारा देश॥
सब देशों देशो से......
जहाँ राम ने जन्म लिया, जहाँ कृष्ण ने खेल किये,
अवतारों का जन्म स्थल, प्यारा देश हमारा देश ॥
सब देशों से......
भगवा ध्वज है गुरु हमारा, संगठना है ध्येय हमारा,
जीवन से भी है बढ़कर प्यारा देश, हमारा देश ॥
सब देशों से......
भारत माँ तेरी जय हो, विजय हो।
भारत माँ तेरी जय हो, विजय हो।
तू शुद्ध तू बुद्ध तू प्रेम आगार,
तेरा विजय सूर्य माता उदय हो।
भारत माँ.....
आवें पुनः कृष्ण देखें दशा तेरी,
अरविंद गोविन्द बन्दा की जय हो। भारत माँ.....
तेरे लिए मृत्यु हो स्वर्ग का द्वार,
शस्त्रों की झन-झन में वीणा की लय हो ।
भारत माँ.....
मेरा यह संकल्प पूरा करें ईश,
राणा शिवाजी का फिर से उदय हो।
भारत माँ.....
भगवे तले आज हम राष्ट्र बन्धु,
गाएं सभी मिल के माँ तेरी जय हो।
भारत माँ.....
इह धरती है अवतारां दी, इह धरती देश प्यारां दी
इह महिकां भरी कियारी ए, ए जननी वीर हजारां दी॥ इह धरती है....
हार गले दा गंग कवेरी, मुकुट हिमालय पर्वत दा
इस धरती दा हर इक बन्दा, भला मंगदा सरबत दा
पोण सुगंधित चले निरन्तर, थोड़ न कदे बहारां दी।
इह महिकां भरी....
सरहद्दां दी करदे राखी, अणखीले ने वीर सिपाही
ऊघे लेखकां साईंसदाना, दी माता है धरत प्यारी
भीमराव ते वीर सावरकर, भगतसिंह सरदारां दी॥ इह महिकां भरी....
रल मिलके रहिंदे ने सारे, विच दिलां दे भेद नहीं
जाति भाषा नाम दे उत्ते, ऊंच नीच दा गेड़ नहीं
अपना एका शक्ति अपनी, परवाह नहीं वंगारां दी॥
इह महिकां भरी....
हिम्मत दुशमन करे न कोई, इस धरती दे लाल बथेरे
उस दुश्मन दे काल ने जेहड़े, इस धरती दी ढाल ने जेहड़े
हुण न उगेगी फसल कदे वी, जैचन्द जहे गद्दारां दी॥
इह महिकां भरी....
Wednesday, December 14, 2022
है हिंदू वीर जवान ये देश हमारा हैइस देश पर मर मिटाना कर्तव्य हमारा है
है हिंदू वीर जवान ये देश हमारा है
इस देश पर मर मिटाना कर्तव्य हमारा है
है हिंदू वीर जवान ये देश हमारा है
https://youtu.be/sm1cnQ9qwco
हमे अपने भारत की तकदीर बनानी है
जो बन के न बिगड़े तसवीर बनानी है
है दूर अभी मंजिल और दूर किनारा है
है हिंदू वीर जवान ये देश हमारा है
हम अपने वीरों का एहसान ना भूलेंगे
आजाद भगत सिंह का बलिदान न भूलेंगे
है देश अमर भारत हर दिल ने पुकारा है
है हिंदू वीर जवान ये देश हमारा है
हम अपने वीरों का एहसान न भूलेंगे
आजाद भगत सिंह का बलिदान न भूलेंगे
है देह अमर भारत हर दिल ने पुकारा है
इस देश पर मर मिटाना कर्तव्य हमारा है
है हिंदू वीर जवान ये देश हमारा हैहै
https://youtu.be/sm1cnQ9qwco
Sunday, December 11, 2022
kavita 2022
मेरा सब कुछ अर्पित तुझको , देश आज मैं प्रण करता हूँ!
मेरा क्षण- क्षण कण- कण तुझको , तेरे हेतु आज रखता हूँ!
जीवन में जीतनी आशाएं , जो मैंने जीवन भर पाली!
आज मैंने सब तुझसे जोड़ी , अपनी झोली कर दी खाली!
मेरा वैभव तब ही रहेगा , जब तू होगा वैभवशाली!
सब अर्पित मेरी तकनीकी , जीवन ज्ञान की सभी प्रणाली !
जीवन का सब अर्जन- खर्चन , तेरे चरणों में रखता हूँ!
देश आज मैं प्रण करता हूँ!..........................
..................
चाहे इस पथ पर हों कंटक , चाहे जितनी भी उठक पटक !
चाहे बाधाओं के हों झंझट ,हो अपमानो के घूट घटक!
बाधाएं अंगारे वर्षक , गैसों की गर्मी उत्सर्जक !
रासायनिक क्रियाओं के , चाहे जितने हो उत्प्रेरक!
हर क्रिया को प्रति क्रिया से शांत , सही में करता हूँ!
देश आज मैं प्रण करता हूँ!..............................
मेरा शैशव माँ की ममता , आज है जो मेरी तरुणाई !
अपनी स्वर्णिम जीवन गाथा , मैंने तुझसे ही पाई!
अन्न, वस्त्र , रहने की खातिर , मैंने तुझसे करी कमाई!
तेरा है तुझको ही अर्पित , सब तेरी है, नहीं पराई !
देश प्रथम की प्रबल भावना अपने जीवन में भरता हूँ!
देश आज मैं प्रण करता हूँ!..............................
मेरा सब कुछ अर्पित तुझको , देश आज मैं प्रण करता हूँ!
मेरा क्षण- क्षण कण- कण तुझको , तेरे हेतु आज रखता हूँ!
kavita
आज समस्या और चुनौती दिन दिन बढ़ती जाती है।
नशा और बीमार गाय की संख्या बढ़ती जाती है ।
धड़क रही है धर ताप से बारिश घटती जाती है ,
लम्पी बीमारी से गौ की चमड़ सड़ती जाती है।
चूर नशे में युवा भटकता रिश्तो का संसार तोड़ता ,
हर दिन घर में खटपट करता कभी-कभी घर तक भी बिकता।
कुछ नहीं मिलता चोरी करता पत्नी के आभूषण छिनता,
और इसी के गृह क्लेश में समय से पहले ही बसता।
युवाभ्रष्ट और मस्त नशे में बर्बाद करता जवानी है,
नशा माफिया जाल बिछाकर करता अब मनमानी है।
आंगन की किलकारी खोती सूनी माथे की बिंदिया ,
मां बहिना, बनिता,पितु, भाई की खो गई आंखों की निंदिया।
सैनिक बनाना काम युवा बनता आज नशेड़ी है,
संस्कारी समृद्ध गाँव बनते मद्य बसेड़ी हैं ।
यही चुनौती देश के सम्मुख सीना ताने रोज खड़ी है ,
भारत के वैभव को डँसती समस्या जस की तस पड़ी है।
गायों को हम माँ कहते हैं लेकिन स्थिति बहुत बुरी है ,
सड़कों पर कचरा खाती है देश दुग्ध की वही धुरी है ।
लम्पी बीमारी फैली है देश के कोने कोने में,
सड़ती चमड़ी घाव हैं एक गाय लगी है रोने में ।
कोरोना के समय देश भी लड़खड़ा बीमारी से ,
लम्पी बीमारी के कारण क्यों पड़ा रहा लाचारी से ।
सम्मुख आज चुनौती है लड़ना है और डटना है ,
इस बीमारी से हमको उवरना है उवरना है।
गाय रंभाति बछड़ा रोता बीमारी से जीवन छूटा,
तप्त शरीर और घाव रिस रहा होता जाता सूना खूँटा।
कल तक जिस को हाथ से पाला घास फूस और दिया निवाला,
तड़प तड़प मरती जाती है कौन बने इसका रखवाला ।
जग के पालनहार जिसे माता कहकर पूजते हैं
गाय की हो गई हो दुर्गति प्रभु से ऐसे क्यों रूठते हैं ।
हे ईश्वर अब तुम्ही सहारा जग के पालनहार हो,
सुख-दुख तुम से पैदा होते तुम जीवन आधार हो।
Kavita Surendra ji
आज समस्या और चुनौती दिन दिन बढ़ती जाती है।
नशा और बीमार गाय की संख्या बढ़ती जाती है ।
धड़क रही है धर ताप से बारिश घटती जाती है ,
लम्पी बीमारी से गौ की चमड़ सड़ती जाती है।
चूर नशे में युवा भटकता रिश्तो का संसार तोड़ता ,
हर दिन घर में खटपट करता कभी-कभी घर तक भी बिकता।
कुछ नहीं मिलता चोरी करता पत्नी के आभूषण छिनता,
और इसी के गृह क्लेश में समय से पहले ही बसता।
युवाभ्रष्ट और मस्त नशे में बर्बाद करता जवानी है,
नशा माफिया जाल बिछाकर करता अब मनमानी है।
आंगन की किलकारी खोती सूनी माथे की बिंदिया ,
मां बहिना, बनिता,पितु, भाई की खो गई आंखों की निंदिया।
सैनिक बनाना काम युवा बनता आज नशेड़ी है,
संस्कारी समृद्ध गाँव बनते मद्य बसेड़ी हैं ।
यही चुनौती देश के सम्मुख सीना ताने रोज खड़ी है ,
भारत के वैभव को डँसती समस्या जस की तस पड़ी है।
गायों को हम माँ कहते हैं लेकिन स्थिति बहुत बुरी है ,
सड़कों पर कचरा खाती है देश दुग्ध की वही धुरी है ।
लम्पी बीमारी फैली है देश के कोने कोने में,
सड़ती चमड़ी घाव हैं एक गाय लगी है रोने में ।
कोरोना के समय देश भी लड़खड़ा बीमारी से ,
लम्पी बीमारी के कारण क्यों पड़ा रहा लाचारी से ।
सम्मुख आज चुनौती है लड़ना है और डटना है ,
इस बीमारी से हमको उवरना है उवरना है।
गाय रंभाति बछड़ा रोता बीमारी से जीवन छूटा,
तप्त शरीर और घाव रिस रहा होता जाता सूना खूँटा।
कल तक जिस को हाथ से पाला घास फूस और दिया निवाला,
तड़प तड़प मरती जाती है कौन बने इसका रखवाला ।
जग के पालनहार जिसे माता कहकर पूजते हैं
गाय की हो गई हो दुर्गति प्रभु से ऐसे क्यों रूठते हैं ।
हे ईश्वर अब तुम्ही सहारा जग के पालनहार हो,
सुख-दुख तुम से पैदा होते तुम जीवन आधार हो।
Saturday, December 3, 2022
sangh shakti.
संघ शक्तेरो करनो पेलो, घरे घरे प्रचार हो
तदे भोलो इशी हिन्दु जेतेरो बेड़ो पार हो ।
डेरी डेरी धरती पुड़ जिनु, तेस जिने केराखरू नज़िनों,
कमजोरन तां बजती ओरी (२) जेड़ी हेरा तेड़ी मार हो
तदे भोलो इशी.....
प्रेम एकता जेनन मां भोए, दुनिया तेनन जो जितो जोए,
भाईचारो नहीं जेन लोकन माँ, (२) तेना जेरे मुरदार हो,
तदे भोलो इसी.....
असन शिखेई जेए अक गुरु मंत्र, हेडगेवार तां वीर सावरकर
संघ शक्ति कलयुगे माँ (2), बस ऐसेशे विस्तार हो।
दे भोली इशी....
संघ शक्तेरो.....
Friday, December 2, 2022
2/12/2022
🙏 ये 15 मंत्र जो....हर हिंदू को सीखना और बच्चों को सिखाना चाहिए,
1. Mahadev
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे,
सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् ,
उर्वारुकमिव बन्धनान्,
मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् !!
2. Shri Ganesha
वक्रतुंड महाकाय,
सूर्य कोटि समप्रभ
निर्विघ्नम कुरू मे देव,
सर्वकार्येषु सर्वदा !!
3. Shri hari Vishnu
मङ्गलम् भगवान विष्णुः,
मङ्गलम् गरुणध्वजः।
मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः,
मङ्गलाय तनो हरिः॥
4. Shri Brahma ji
ॐ नमस्ते परमं ब्रह्मा,
नमस्ते परमात्ने ।
निर्गुणाय नमस्तुभ्यं,
सदुयाय नमो नम:।।
5. Shri Krishna
वसुदेवसुतं देवं,
कंसचाणूरमर्दनम्।
देवकी परमानन्दं,
कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम।
6. Shri Ram
श्री रामाय रामभद्राय,
रामचन्द्राय वेधसे ।
रघुनाथाय नाथाय,
सीताया पतये नमः !
7. Maa Durga
ॐ जयंती मंगला काली,
भद्रकाली कपालिनी ।
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री,
स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।।
8. Maa Mahalakshmi
ॐ सर्वाबाधा विनिर्मुक्तो,
धन धान्यः सुतान्वितः ।
मनुष्यो मत्प्रसादेन,
भविष्यति न संशयःॐ ।
9. Maa Saraswathi
ॐ सरस्वति नमस्तुभ्यं,
वरदे कामरूपिणि।
विद्यारम्भं करिष्यामि,
सिद्धिर्भवतु मे सदा ।।
10. Maa Mahakali
ॐ क्रीं क्रीं क्रीं,
हलीं ह्रीं खं स्फोटय,
क्रीं क्रीं क्रीं फट !!
11. Hanuman ji
मनोजवं मारुततुल्यवेगं,
जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठं।
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं,
श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥
12. Shri Shanidev
ॐ नीलांजनसमाभासं,
रविपुत्रं यमाग्रजम ।
छायामार्तण्डसम्भूतं,
तं नमामि शनैश्चरम् ||
13. Shri Kartikeya
ॐ शारवाना-भावाया नम:,
ज्ञानशक्तिधरा स्कंदा ,
वल्लीईकल्याणा सुंदरा।
देवसेना मन: कांता,
कार्तिकेया नामोस्तुते ।
14. Kaal Bhairav ji
ॐ ह्रीं वां बटुकाये,
क्षौं क्षौं आपदुद्धाराणाये,
कुरु कुरु बटुकाये,
ह्रीं बटुकाये स्वाहा।
15. Gayatri Mantra
ॐ भूर्भुवः स्वः,
तत्सवितुर्वरेण्यम्
भर्गो देवस्य धीमहि
धियो यो नः प्रचोदयात् ॥
खुद भी सीखे और परिवार / बच्चों को भी सिखायें🙏
आशीष सक्सेना
Thursday, November 17, 2022
17/11/2022 panchang
🌞आज का हिन्दु पंचाग 🌞
*⛅दिनांक - 17 नवम्बर 2022*
*⛅दिन - गुरुवार*
*⛅विक्रम संवत् 02 मार्गशीर्ष- 2079*
*⛅शक संवत् - 1944*
*⛅अयन - दक्षिणायन*
*⛅ऋतु - हेमंत*
*⛅मास - मार्गशीर्ष ( गुजरात एवं महाराष्ट्र में कार्तिक मास )*
*⛅पक्ष - कृष्ण*
*⛅तिथि - अष्टमी सुबह 07:57 तक तत्पश्चात नवमी*
*⛅नक्षत्र - मघा रात्रि 09:21 तक तत्पश्चात पूर्वाफाल्गुनी*
*⛅योग - इन्द्र रात्रि 01:24 तक तत्पश्चात वैधृति*
*⛅राहु काल - दोपहर 01:47 से 03:10 तक*
*⛅सूर्योदय - 06:54*
*⛅सूर्यास्त - 05:55*
*⛅दिशा शूल - दक्षिण दिशा में*
*⛅ब्राह्ममुहूर्त - प्रातः 05:10 से 06:02 तक*
*⛅निशिता मुहूर्त - रात्रि 11:59 से 12:51 तक पंचक नहीं है*
*⛅व्रत पर्व विवरण -*
*⛅विशेष - अष्टमी को नारियल का फल खाने से बुद्धि का नाश होता है । नवमी को लौकी खाना त्याज्य है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड : 27.29-34)*
*🔹दरिद्रता दूर, रोजी-रोटी में बरकत भरपूर🔹*
*🔹दरिद्रता भगानी हो तो व्यर्थ खर्च न करो । ब्याज पर कर्ज ले के गाड़ियाँ न खरीदो एवं मकान न बनाओ । आवक बढ़ानी हो अथवा बरकत लानी हो तो मंत्र है : 'ॐ अच्युताय नमः' जिसका पद कभी च्युत नहीं होता... इन्द्रपद भी च्युत हो जाता है, ब्रह्माजी का पद भी च्युत हो जाता है फिर भी जो च्युत नहीं होते अपने स्वभाव से, अपने-आपसे, उन परमेश्वर 'अच्युत' को हम नमस्कार करते हैं । अच्युतं केशवं रामनारायणं... ।*
*🔹'ॐ अच्युताय नमः' मंत्र की गुरुवार से गुरुवार २ सप्ताह या ४ सप्ताह तक ११ मालाएँ रोज जप करे । कुछ ही दिनों में यह मंत्र सिद्ध ह जायेगा। फिर जो काम-धंधा या नौकरी करता है वह जल में देखते हुए २१ बार जप करे और दायाँ नथुना बंद करके बायाँ स्वर चलाकर वह जल पिये । इससे रोजी-रोटी में बरकत होती है और दरिद्रता मिटती है ।*
*👉🏻 श्रद्धा से करके देख लें । आजमायेगा तो श्रद्धा नहीं रहेगी । श्रद्धा से करेगा तो दरिद्रता नहीं रहेगी ।*
*🔹नारी कल्याण पाक🔹*
*🔹यह पाक युवतियों, गर्भिणी, नवप्रसूता माताएँ तथा महिलाएँ – सभी के लिए लाभदायी है ।*
*🔹लाभ : यह बल व रक्तवर्धक, प्रजनन – अंगों को सशक्त बनानेवाला, गर्भपोषक, गर्भस्थापक (गर्भ को स्थिर – पुष्ट करनेवाला), श्रमहारक (श्रम से होनेवाली थकावट को मिटानेवाला) व उत्तम पित्तनाशक है । एक – दो माह तक इसका सेवन करने से श्वेतप्रदर (ल्यूकोरिया, अत्यधिक मासिक रक्तस्राव व उसके कारण होनेवाले कमरदर्द, रक्त की कमी, कमजोरी, निस्तेजता आदि दूर होकर शक्ति व स्फूर्ति आती है । जिन माताओं को बार-बार गर्भपात होता हो उनके लिए यह विशेष हितकर है । सगर्भावस्था में छठे महिने से पाक का सेवन शुरू करने से बालक हृष्ट-पुष्ट होता है, दूध भी खुलकर आता है ।*
*🔹धातु की दुर्बलता में पुरुष भी इसका उपयोग कर सकते हैं ।*
*🔹सामग्री : सिंघाड़े का आटा, गेंहू का आटा व देशी घी प्रत्येक २५० ग्राम, खजूर १०० ग्राम, बबूल का पिसा हुआ गोंद १०० ग्राम, पिसी मिश्री ५०० ग्राम ।*
*🔹विधि : घी को गर्म कर गोंद को घी में भून लें । फिर उसमें सिंघाड़े व गेंहू का आटा मिलाकर धीमी आँच पर सेंकें । जब मंद सुगंध आने लगे तब पिसा हुआ खजूर व मिश्री मिला दें । पाक बनने पर थाली में फैलाकर छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर रखें ।*
*🔹सेवन-विधि : २ टुकड़े ( लगभग २० ग्राम ) सुबह शाम खायें । ऊपर से दूध पी सकते हैं ।*
*🔹सावधानी : खट्टे, मिर्च-मसालेदार व तेल में तले हुए तथा ब्रेड-बिस्कुट आदि बासी पदार्थ न खायें ।*
*🌹 शनिवार के दिन विशेष प्रयोग 🌹*
*🌹 शनिवार के दिन पीपल के वृक्ष का दोनों हाथों से स्पर्श करते हुए 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का 108 बार जप करने से दुःख, कठिनाई एवं ग्रहदोषों का प्रभाव शांत हो जाता है । (ब्रह्म पुराण)*
*🌹 हर शनिवार को पीपल की जड़ में जल चढ़ाने और दीपक जलाने से अनेक प्रकार के कष्टों का निवारण होता है । (पद्म पुराण)*
*🔹आर्थिक कष्ट निवारण हेतु🔹*
*🔹एक लोटे में जल, दूध, गुड़ और काले तिल मिलाकर हर शनिवार को पीपल के मूल में चढ़ाने तथा ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र जपते हुए पीपल की ७ बार परिक्रमा करने से आर्थिक कष्ट दूर होता है
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